VIRGINIA WOOLF

वर्जीनिया वुल्फ़ का जन्म 1882 में लन्दन में हुआ। पिता सर लेज़ली स्टीफन एक जाने-माने दार्शनिक, आलोचक और जीवनी लेखक थे। स्वास्थ्य अच्छा न रहने के कारण वर्जीनिया औपचारिक शिक्षा नहीं ले पाईं और उन्होंने घर पर ही अपनी पढ़ाई की जिसमें उन्हें अपने पिता का पूरा सहयोग मिला। बीसवीं शताब्दी के प्रारम्भिक वर्षों में वह लेखकों-चित्रकारों के 'ब्लूम्सबरी ग्रुप' से जुड़ी रहीं। उन्होंने 1912 में एक प्रमुख राजनीतिक चिंतक लियोनार्ड सिडनी वुल्फ़ से विवाह किया, और 1917 में उन्हीं के साथ होगार्थ प्रेस की स्थापना की। टी. एस. इलियट की प्रारम्भिक कविताएँ और स्वयं वर्जीनिया वुल्फ के अपने नौ उपन्यास यहीं से छपे। उन्होंने सूक्ष्म मनोभावों को व्यक्त करने के लिए ‘स्ट्रीम ऑव कॉन्शसनेस' तकनीक को माध्यम बनाया। उनकी मौलिकता ने उन्हें बीसवीं शताब्दी की एक प्रमुख और महत्त्वपूर्ण कथाकार के रूप में स्थापित कर दिया। उनके उपन्यासों में मिसिज़ डैलोवे (1925) और टु द लाइटहाऊस (1927) सर्वाधिक चर्चित हुए। कथा साहित्य-लेखन के विकास में उनका महत्त्वपूर्ण योगदान रहा। सामान्य शारीरिक स्वास्थ्य से वंचित वर्जीनिया वुल्फ़ अतिशय संवेदनशील भी थीं। वह मानसिक अवसाद से ग्रस्त रहीं। समकालीन स्थितियों ने उन्हें झकझोर कर रख दिया। युद्ध ने उनके मन पर घातक प्रभाव डाला। इंग्लैंड में हुए हवाई युद्ध ने उन्हें विचलित कर दिया। उन्हें लगा कि इस सब के रहते वह पागल हो जाएँगी और अपने पति पर बोझ बन जाएँगी। इस तरह, 1941 में, उन्होंने आत्महत्या कर ली।

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