RAJEE SETH

राजी सेठ मानव मन की कुशल चितेरी राजी सेठ का जन्म, 1935 में छावनी नौशेरा (पाकिस्तान) में हुआ था। राजी विद्यार्थी तो रहीं अंग्रेज़ी साहित्य की, लेकिन साहित्य साधना के लिए उन्होंने चुना हिन्दी को। लेखन भले ही उन्होंने देर से शुरू किया, पर कब वह हिन्दी की माथे की बिन्दी बन गईं, उन्हें खुद भी नहीं पता लगा। 'निष्कवच' और 'तत्सम' (उपन्यास), और 'अन्धे मोड़ से आगे', 'तीसरी हथेली', 'दूसरे देशकाल में', 'यात्रा मुक्त', 'यह कहानी नहीं', और 'खाली लिफाफ़ा' जैसे कहानी संग्रहों ने उन्हें हिन्दी साहित्य में एक नया मुकाम दिया। साहित्य साधना के लिए राजी को अनन्त गोपाल शेवड़े पुरस्कार, हिन्दी अकादमी सम्मान, वग्मणि सम्मान और रचना सम्मान से नवाज़ा जा चुका है।

RAJEE SETH