DR. PRANAV KUMAR BANERJEE

डॉ. प्रणव कुमार बनर्जी जन्म : 23 दिसम्बर 1935, जमालपुर (अब बंगला देश में), क्रान्तिकारी व स्वतन्त्रता सेनानी परिवार में। निवास : देश विभाजन के तुरन्त बाद से मध्यप्रदेश (अब छत्तीसगढ़) के स्थायी निवासी। शिक्षा : होमियोपैथी एवं बायोकेमेस्ट्री में डिप्लोमा, 1963 कृतित्व : साहित्य की विभिन्न विधाओं में लेखन । प्रकाशन-प्रसारण। लघुकथा-श्रेष्ठ कौन? साप्ताहिक हिन्दुस्तान 1-5-1955 । तब से अब तक लगातार लेखन कार्य। प्रकाशित कृतियाँ : 'तर्पण', 'अमृत यात्रा' (उपन्यास); 'नीरू' (बालोपयोगी उपन्यास); 'मेरा आकाश' (आत्मकथा मूलक उपन्यास); 'गीता का अध्ययन क्यों?' (चिन्तन); 'अपराजेय होमियोपैथी', 'व्यावहारिक होमियोपैथी', 'विशिष्ट औषधियाँ', 'सफल होमियोपैथी के सरल सोपान', 'सम्पूर्ण होमियोपैथी' (सभी चिकित्सा ग्रन्थ); 'वाल्मीकि रामायण की कहानियाँ' (किशोपयोगी); 'यात्रा संस्मरण' (अमरनाथ, बद्रीनाथ, केदारनाथ एवं थाईलैण्ड); ‘राग मुक्तक' (कविता संग्रह); 'मेरे पचहत्तर वर्ष पूर्ण हुए' (जीवनी); सामवेदीय नित्यकर्म विधि। "अन्य विधाओं में नियमित लेखन, प्रकाशन एवं प्रसारण। * 1967 से 1969 रात्रिकालीन होमियोपैथी महाविद्यालय, बिलासपुर में आयुर्विज्ञान का अध्यापन। * 1992 से लगातार दस वर्षों तक ग्वालियर से प्रकाशित होमियो त्रैमासिक 'हनीमन दिशा' के सम्पादक मंडल के सदस्य। * 2000-2006 तक इंडियन होमियोपैथिक आर्गेनाइजेशन के राष्ट्रीय महासचिव एवं राष्ट्रीय उपाध्यक्ष। * 1964 से लगातार 22 वर्षों तक राजनीति में सक्रियता। आपातकाल (1975) में मीसाबन्दी। * सन 2000 में नयी दिल्ली में राष्ट्रीय हिन्दी सेवी सहस्राब्दी सम्मान।। * उपन्यास 'अमृत यात्रा' को 10 अक्टूबर 2010 को राज्यपाल म.प्र. के हाथों हरिहर निवास द्विवेदी सम्मान।

DR. PRANAV KUMAR BANERJEE