SHEEN KAAF NIZAM

शीन काफ़ निज़ाम 26 नवम्बर, 1945 को जोधपुर में पैदा हुए शीन काफ़ निज़ाम ने शाइरी के साथ-साथ आलोचना, शोध और सम्पादन में भी उल्लेखनीय कार्य किया है। जिसके लिए उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार, राष्ट्रीय इक़बाल सम्मान, भारतीय भाषा संस्थान द्वारा भाषा-भारती सम्मान, बेगम अख़्तर ग़ज़ल सम्मान तथा राजस्थान उर्दू अकादेमी का सर्वोच्च ‘महमूद शीरानी सम्मान’ से सम्मानित किया गया। शीन काफ़ निज़ाम की शाइरी के प्रकाशित संग्रहों में ‘दश्त में दरिया’, ‘साया कोई लम्बा न था’, ‘सायों के साये में’, ‘रास्ता ये कहीं नहीं जाता’ और ‘गुमशुदा दैर की गूँजती घंटियाँ’ (साहित्य अकादेमी द्वारा पुरस्कृत उर्दू कविता संग्रह) देवनागरी में, तथा ‘नाद’, ‘बयाज़े खो गई है’ और ‘गुमशुदा दैर की गूँजती घंटियाँ’ उर्दू में उल्लेखनीय हैं। ‘लफ़्ज़ दर लफ़्ज़’ और ‘मानी दर मानी’ आलोचनात्मक और विवेचनात्मक पुस्तकों के लेखक शीन काफ़ निज़ाम ने ‘ग़ालिलिबियत और गुप्ता रिज़ा’ (माहिरे-ग़ालिलिबियत स्व. अल्लामा कालीदास गुप्ता ‘रिज़ा’) और ‘भीड़ में अकेला’ (स्व. मख्मूर सईदी पर केन्द्रित) के सम्पादन के साथ उर्दू की साहित्यिक पत्रिकाओं का भी सम्पादन किया। कई राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय साहित्यिक आयोजनों में रचना-पाठ तथा पत्रा-वाचन के लिए आमन्त्रित निज़ाम इंग्लैंड, अमरीका, सीरिया, सऊदी अरब, पाकिस्तान, नेपाल, कष्तर तथा खाड़ी देशों का सफष्र कर चुके हैं। नन्दकिशोर आचार्य के साथ उर्दू कवियों का संचयन और सम्पादन के साथ-साथ हिन्दी तथा राजस्थानी का उर्दू एवं उर्दू साहित्य का हिन्दी में अनुवाद और लिप्यन्तरण भी किया है। सम्पर्क: कल्लों की गली, जोधपुर-342001 (राजस्थान)

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