NEELESH MISRA

​नीलेश का भारत में कलात्मकता की दुनिया में किसी लीक से परे, एक अनूठा स्थान है। वे एक वरिष्ठ पत्रकार, हिन्दी फिल्मों के अग्रणी गीतकार, ग्रामीण समाचार पत्र ‘गाँव कनेक्शन’ के संस्थापक, सात किताबों के लेखक व भारत के सबसे चहेते किस्सागो हैं। चार करोड़ श्रोताओं से चार साल पुराने उनके रेडियो के रिश्ते ने नब्बे बड़े व छोटे शहरों में लोगों को उनकी सुनाई कहानियों का चस्का लगा दिया है और हिन्दुस्तान में कहानियाँ सुनने-सुनाने की परम्परा को दोबारा जीवित कर दिया है।​ ​हिन्दी फिल्मों में नीलेश तीस से अधिक फिल्मों में गीत लिख चुके हैं। इनमें पिछले डेढ़ दशक के कुछ सबसे मशहूर गीत शामिल हैं। पत्रकार के नाते नीलेश ने ‘इंडिया अब्रॉड’ अखबार से अपना सफ़र आरम्भ किया और अन्तरराष्ट्रीय न्यूज एजेंसी ‘एसोसिएटेड प्रेस’ में नौ साल कार्य करने के बाद और हिन्दुुस्तान टाइम्स में डिप्टी एग्जीक्यूटिव एडिटर रहे। भारतीय पत्रकारिता का सर्वोच्च सम्मान, रामनाथ गोयनका पुरस्कार, दो बार जीत चुके हैं, हिन्दुस्तान टाइम्स और गाँव कनेक्शन में अपने काम के लिए। कुलिश पुरस्कार से दो बार सम्मानित। इससे पहले उन्होंने अंग्रेजी में पाँच किताबें लिखी हैं - इंडियन एयरलाइन्स हाईजैकिंग पर ‘173 हावर्स इन कैप्टिविटी’, नेपाल शाही परिवार हत्याकांड की कहानी ‘एंड ऑफ द लाइन’, उपन्यास ‘वन्स अपॉन ए टाइमजोन’, उग्रवाद प्रभावित क्षेत्रों से ‘द एब्सेंट स्टेट (राहुल पंडित के साथ)’ व अपने पिता डॉ. शिवबालक मिश्र के साथ उनकी आत्मकथा ‘ड्रीम चेजिंग’। दो किताबों (‘इंडिया यात्रा’ व ‘इंस्पायर्ड इंडिया’) का सम्पादन किया है। हिन्दी में उनकी पहली दो पुस्तकें थीं ‘नीलेश मिसरा का याद शहर वॉल्यूम 1-2’ (कहानी संग्रह)। पिछले कई वर्षों में नीलेश ने कलात्मकता के क्षेत्रा में निरन्तर नये प्रयोग करने की कोशिश की है - भारत का पहला किस्सागोई करता बैंड (बैंड कॉल्ड नाइन), भारत की पहली लेखकों की कम्पनी (कंटेंट प्रोजेक्ट), भारत का पहला रेडियो कहानियों का प्रोजेक्ट (याद शहर), और उनका सबसे प्रिय प्रोजेक्ट, भारत का पहला ग्रामीण अखबार (गाँव कनेक्शन)।

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