AACHARYA RAMANATH JHA

आचार्य रमानाथ झा (1906 -1971 ) छात्रक रूप मे अंग्रेजी आ संस्कृत पढ़लनि, मुदा रचनाकार भेलाह मैथिलीक । हिनक पहिल रचना छपलनि 1929 ई मे । सुखद संयोग अछि जे आचार्य रामनाथ झा, हरिमोहन झा आ यात्रीजी एक्के वर्ष, एक्के पत्रिका मे आ छात्रावस्थे मे लेखन शुरू कयलनि । हरिमोहन झा, यात्रीजी गद्य-पद्य दुनू लिखलनि, आचार्य रमानाथ झा केवल गद्य । ओ समय छल नव-जागरणक पल्लवित पुष्पित होयबाक । आवश्यकता रहय गद्य-लेखन केँ सबल-समृद्ध करबाक । आचार्य रमानाथ झा मैथिली गद्य के स्वरुप प्रदान कयलनि । शोध - समीक्षा द्वारा मैथिलि साहित्य केँ दिशा देलनि । विद्यापतिक भाषा-साहित्य एकबेर फेर अखिल भारतीय सारस्वत समाजक विमशर्क विषयक बनि गेल । ओकर जड़ि तँ बलगर होयबे कयल, फूल-पात सेहो गमकि उठल ।

AACHARYA RAMANATH JHA