Editor Jean Dreze, Co-Editor Kamal Nayan Chaubey

ज्याँ द्रेज ने यूनिवर्सिटी ऑफ एसेक्स से गणितीय अर्थशास्त्र का अध्ययन किया है और इंडियन स्टेटिस्टिकल इंस्टीट्यूट, नयी दिल्ली से पीएच. डी. की उपाधि प्राप्त की है। उन्होंने लन्दन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स और डेल्ही स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में अध्यापन किया है और वर्तमान में राँची विश्वविद्यालय में विजिटिंग प्रोफ़ेसर और दिल्ली स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स में मानद प्रोफ़ेसर हैं। विकास अर्थशास्त्र और सार्वजनिक नीतियों, विशेषकर उनके भारतीय सन्दर्भों में उन्होंने बहुमुखी योगदान दिया है। ग्रामीण विकास, सामाजिक असमानता, प्राथमिक शिक्षा, शिशु पोषण, स्वास्थ्य सेवाएँ और खाद्य सुरक्षा उनके शोध के प्रमुख विषय हैं। ज्याँ द्रेज ने अमर्त्य सेन के साथ हंगर एंड पब्लिक एक्शन (ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस, 1989) और एन अनसर्टेन ग्लोरी: इंडिया एंड इट्स कंट्राडिक्शंस (ओयूपी, 2002) का सह-सम्पादन किया है और पब्लिक रिपोर्ट ऑन बेसिक एजुकेशन इन इंडिया के लेखक-मंडल से भी जुड़े हैं जो प्रोब (PROBE) रिपोर्ट के नाम से जाना जाता है। कमल नयन चौबे दिल्ली विश्वविद्यालय के दयाल सिंह कॉलेज में राजनीति विज्ञान पढ़ाते हैं। इनकी प्रकाशित पुस्तकों में जातियों का राजनीतिकरण: बिहार में पिछड़ी जातियों के उभार की दास्तान (2008), और जंगल की हकदारी: राजनीति और संघर्ष (2015) सम्मिलित हैं। इन्होंने जॉन रॉल्स और विल किमलिका जैसे सुप्रसिद्ध राजनीतिक सिद्धान्तकारों की कृतियों का हिन्दी अनुवाद किया है। ये विकासशील समाज अध्ययन पीठ (सीएसडीएस) से प्रकाशित होने वाली समाज विज्ञान की पूर्व-समीक्षित पत्रिका प्रतिमान: समय समाज संस्कृति की सम्पादकीय टीम से भी जुड़े हैं।

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