DR. NAGENDRA

डॉ. नगेन्द्र जन्म : 22 मार्च, 1915 को जिला अलीगढ़ (उ.प्र) के अतरौली कस्बे में। शिक्षा : 1946 में आगरा विश्वविद्यालय से डी. लिट् । शोध का विषय था-रीति काव्य की भूमिका तथा देव और उनकी कविताएँ। अध्यापन: 1937 में प्रारंभ किया। दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में अध्यक्ष पद से सेवा निवृत्ति के बाद वैज्ञानिक एवं तकनीकि शब्दावली आयोग के परामर्शदाता रहे। साहित्य सेवा : पहली पुस्तक 'वनमाला' काव्य संग्रह, बाद में समालोचना के क्षेत्र में प्रतिष्ठित। निबंधकार और आलोचक के रूप में प्रसिद्धि साहित्यशास्त्र में परंपरा और आधुनिकता जोड़नेवाले अप्रतिम साहित्यकार। 'रीतिकाव्य की भूमिका' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार। 1983 में भारत सरकार ने 'पद्मभूषण' से अंलकृत किया। उ. प्र. हिन्दी संस्थान द्वारा भारत-भारती पुरस्कार प्रदान किया गया। 'अर्धकथा' आत्मकथा के अतिरिक्त डॉ. नगेन्द्र द्वारा रचित और संपादित पुस्तकों की संख्या एक शतक से कहीं अधिक। प्रमुख कृतियाँ : रीति काव्य की भूमिका, रस सिद्धांत, भारतीय काव्यशास्त्र की भूमिका, भारतीय सौंदर्य शास्त्र की भूमिका, साहित्य का समाजशास्त्र, हिन्दी साहित्य का बृहद् इतिहास, पाश्चात्य काव्यशास्त्र : सिद्धांत और वाद, भारतीय साहित्य और भारतीय समीक्षा आदि।

DR. NAGENDRA