INTEZAR HUSSAIN

इन्तिज़ार हुसैन 7 दिसम्बर 1923 को क़स्बा डिबाई, ज़िला बुलन्दशहर, उत्तर प्रदेश में पैदा हुए। उनकी शिक्षा मेरठ में हुई तथा बँटवारे के समय वह लाहौर, पाकिस्तान चले गये और मृत्युपर्यन्त वहीं रहे। देश-विदेश का शायद ही कोई ऐसा पुरस्कार हो, जो इन्तिज़ार हुसैन को न मिला हो। भारत में भी वह यात्रा पुरस्कार तथा साहित्य अकादेमी द्वारा प्रेमचन्द फेलोशिप से नवाज़े गये। इन्तिज़ार हुसैन जिस स्तर के लेखक हैं, वहाँ किसी पुरस्कार की कोई अहमियत नहीं है। दरअस्ल इन्तिज़ार हुसैन एक लिविंग लीजेंड की हैसियत रखते हैं।इन्तिजशर हुसैन आरम्भ से ही पाकिस्तान के प्रमुख उर्दू अख़बार ‘जंग’ तथा बाद में अंग्रेज़ी अख़बार ‘द नेशन’ में भी लगातार समसामयिक तथा साहित्यिक विषयों पर कालम लिखते रहे। इन कालमों पर आधारित उनकी कई पुस्तकें भी प्रकाशित हो चुकी हैं।हुसैन का साहित्य केवल उपन्यासों एवं कहानियों तक ही सीमित नहीं रहा। उन्होंने ड्रामे, सफ़रनामे तथा जीवन वृत्तान्त भी लिखे। इन्तिज़ार हुसैन ने अंग्रेज़ी कहानियों, उपन्यासों एवं ड्रामों के अनुवाद के साथ-साथ आलोचनात्मक निबन्ध भी लिखे। ‘चाँद-गहन’, ‘दिन और दास्तान’, ‘बस्ती’, 'तज़करा' तथा ‘आगे समन्दर है’, उनके उपन्यास हैं। उनकी कहानियों के सभी संग्रहों को दो हिस्सों में ‘जनम कहानियाँ’ तथा ‘क़िस्से -कहानियाँ’ के नाम से समग्र रूप में प्रकाशित किया जा चुका है।‘ख़्वाबों के मुसाफिर’, 'नफ़रत के पर्दे में’, ‘पानी के क़ैदी ’ आदि इन्तिज़ार हुसैन के टी.वी. तथा स्टेज ड्रामे हैं।हकीम अज़मल ख़ाँ तथा क़ायदे - आज़म के लड़कपन तक की जीवनी उन्होंने बहुत ही दिलचस्प अन्दाज़ में लिखी।‘ज़मी और फ़लक और’ तथा ‘जुस्तजू क्या है’इन्तिज़ार हुसैन के सफ़रनामे हैं, जिनमें ‘जुस्तजू क्या है’ भारत का सफ़रनामा है।‘अलामतों का ज़वाल’ तथा ‘नज़रिये से आगे’ इन्तिज़ार हुसैन की आलोचनात्मक निबन्धों पर आधारित पुस्तकें हैं। इसके अलावाइन्तिज़ार हुसैन ने ‘अलिफष् लैला’ की कहानियों का सरल उर्दू में अनुवाद भी किया है।निधन: 2 फ़रवरी 2016, लाहौर, पाकिस्तान।

INTEZAR HUSSAIN