JYOTISH JOSHI

साहित्य, कला, संस्कृति के सर्वमान्य आलोचक के रूप में प्रतिष्ठित ज्योतिष जोशी ने आलोचना को कई स्तरों पर समृद्ध किया है। साहित्य इनकी आलोचना का केन्द्रीय क्षेत्रा है, पर कला तथा नाटक-रंगमंच सहित संस्कृति के दूसरे अनिवार्य अनुशासनों पर भी इन्होंने मनोयोग से काम किया है। अपनी सहज प्रवहमान भाषा तथा विवेचन की तार्किक पद्धति के कारण प्रसिद्ध इस आलोचक ने जहाँ आलोचना को सहज-स्वीकार्य बनाया है, वहीं उसे मानवीय विमर्शों का आख्यान भी। अपने महत्त्वपूर्ण कार्यों के लिए बिहार राष्ट्रभाषा परिषद् का ‘साहित्य सेवा सम्मान’, हिन्दी अकादमी, दिल्ली का ‘साहित्यिक कृति सम्मान’, आलोचना में विशिष्ट योगदान के लिए ‘देवीशंकर अवस्थी’ तथा ‘प्रमोद वर्मा स्मृति सम्मान’ पा चुके ज्योतिष जोशी को अनेक महत्त्वपूर्ण शिक्षावृत्तियाँ भी मिली हैं जिनमें केन्द्रीय संगीत नाटक अकादमी, केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मन्त्रालय, दिल्ली, माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्राकारिता विश्वविद्यालय, भोपाल तथा इंडिया फाउंडेशन फॉर द आर्ट्स, बंगलौर की शिक्षावृत्तियाँ उल्लेखनीय हैं। इनकी प्रकाशित पुस्तकें हैंµसम्यक्, जैनेन्द्र संचयिता, विधा की उपलब्धि: त्यागपत्रा, आर्टिस्ट डायरेक्टरी, कला विचार, कला परम्परा, कला पद्धति, प्रतीक-आत्मक (दो खण्ड), (सम्पादन), जैनेन्द्र और नैतिकता, आलोचना की छवियाँ, उपन्यास की समकालीनता, पुरखों का पक्ष, संस्कृति विचार, साहित्यिक पत्राकारिता, विमर्श और विवेचना, भारतीय कला के हस्ताक्षर, आधुनिक भारतीय कला के मूर्धन्य, आधुनिक भारतीय कला, रूपंकर, कृति आकृति, रंग विमर्श, नेमिचन्द्र जैन (आलोचना), सोनबरसा (उपन्यास) तथा यह शमशेर का अर्थ। हिन्दी अकादमी, दिल्ली के सचिव रह चुके श्री जोशी इन दिनों केन्द्रीय ललित कला अकादमी (संस्कृति मन्त्रालय, भारत सरकार) में हिन्दी सम्पादक हैं।

JYOTISH JOSHI