KUNWAR NARAYAN

अग्रणी कवि कुँवर नारायण उन विरल बुद्धिजीवियों में हैं जिन्होंने अपनी वैश्विक संवेदनाओं के साथ अपने देश की संस्कृति और इतिहास को पक्की ज़मीन दी है। वे प्रमुखतः कवि हैं, किन्तु साहित्य की सब तरह की विधाओं में भी शुरू से लिखते रहे हैं -- कहानी, समीक्षा, विचार, सिनेमा, निबन्ध, डायरी आदि। उनका पहला कविता संग्रह 1956 में छपा और वे आज तक लगातार लिख रहे हैं। कुँवर नारायण के लेखन का कई भारतीय तथा विदेशी भाषाओं में अनुवाद हुआ है तथा वे अनेक राष्ट्रीय एवं अन्तरराष्ट्रीय पुरस्कारों से सम्मानित हैं, जिनमें ‘कुमारन आशान’, ‘साहित्य अकादेमी’, ‘कबीर’, ‘शलाका’, ‘ऑनर ऑफ वार्सा यूनिवर्सिटी’, रोम का ‘प्रीमियो फ़ेरोनिया’, इलाहबाद से ‘डी.लिट्. की मानद उपाधि’, ‘ज्ञानपीठ’, ‘पद्म भूषण’ तथा साहित्य अकादेमी की ‘महत्तर सदस्यता’ हैं।

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