M.F.HUSAIN

विश्वविख्यात चित्रकार एम.एफ. हुसेन की आत्मकथा — उनकी अपनी खास जुबान में। हिन्दी केलिग्राफी की है उनकी प्रशंसिका तथा मित्रा राशदा सिद्दिकी ने, जिससे यह कलाकृति-तुल्य किताब और भी ज्यादा आकर्षक तथा पठनीय बन गई है। इस अनोखी कृति के बारे में हिन्दी के अद्वितीय मनीषी तथा कथा-शिल्पी निर्मल वर्मा लिखते हैं : हुसेन की आत्मकथा की यह अनोखी और अद्भुद विशेषता है कि वह ‘अनुवाद’ की बैसाखी से नहीं, सीधे चित्रकला की शर्तों पर, बिंबों के माध्यम से अपनी भाषा को रूपान्तरित करती है। ऐसा वह इसलिए कर पाती है, क्योंकि उसमें चित्रकार हुसेन उस ‘दूसरे’ से अपना अलगाव और दूरी बनाए रखते हैं, जिसका नाम मक़बूल है, जिसकी जीवन-कथा वह बाँचते हैं, जिसने जन्म लेते ही अपनी माँ को खो दिया, जो इन्दौर के गली-कूचों में अपना बचपन गुजारता है, बंबई के चौराहों पर फ़िल्मी सितारों के होर्डिंग बनाता है, कितनी बार प्रेम में डूबता है, उबरता है, उबर कर जो बाहर उजाले में लाता है, उनकी तस्वीरें बनाता है...धूल-धूसरित असंख्य ब्यौरे, जिनके भीतर से एक लड़के की भोली, बेडौल, निश्छल छवि धीरे-धीरे ‘एम.एफ. हुसेन की प्रतिमा में परिणत होती है।

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