PIYUSH DAIYA

27 अगस्त, 1973 को बीकानेर में जन्मे पीयूष दईया समकालीन हिन्दी साहित्य व कला परिदृश्य के अग्रणी युवा नामों में से एक हैं। यह हिन्दी साहित्य, संस्कृति और विचार पर एकाग्र पत्रिकाओं ‘पुरोवाक्’ (श्रवण संस्थान, उदयपुर) और ‘बहुवचन’ (महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा) के सम्पादक रहे हैं और इन्होंने लोकविद्या पर एकाग्र भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर की त्रैमासिक पत्रिका ‘रंगायन’ का भी बरसों तक सम्पादन किया है। इन्होंने लोक-अन्वीक्षा पर एकाग्र ‘लोक’ (भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर) व ‘लोक का आलोक’ (मरुधारा शोध केन्द्र, बीकानेर) तथा ललित कला अकादेमी, दिल्ली के लिए ‘कला भारती, खण्ड-1, 2’ नामक वृहद् ग्रन्थों के सम्पादन सहित हकु शाह के निबन्धों के संचयन का हिन्दी में अनुवाद व सम्पादन किया है। अनेक शोध-परियोजनाओं व सम्पादन के काम करने के अलावा इन्होंने कुछ संस्थानों में सलाहकार के रूप में भी अपनी सेवाएँ देते रहे हैं। चित्रकार हकु शाह, अखिलेश और मनीष पुष्कले के साथ आपके पुस्तकाकार वार्तालाप प्रकाशित हैं और यूनान के आधुनिक कवि कवाफ़ी के हिन्दी काव्यानुवादों की पुस्तक ‘माशूक़’ भी। सम्प्रति यह लोकमत समाचार, नागपुर की रचना वार्षिकी ‘दीप भव’ के प्रकल्प निदेशक हैं और रंगमंच पर एकाग्र त्रैमासिक ‘नटरंग’ के अतिथि सम्पादक भी।

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