PROF. DILIP SINGH

हिंदी के प्रमुख समकालीन भाषावैज्ञानिक प्रो. दिलीप सिंह (1951) हिंदी भाषाविज्ञान को अपने अनुप्रयुक्त भाषाविज्ञान विषयक लेखन और चिंतन द्वारा निरंतर समृद्ध कर रहे हैं। समाज भाषाविज्ञान और शैलीविज्ञान में विशेष रुचि रखने वाले डॉ. दिलीप सिंह की एक दुर्लभ योग्यता यह है कि वे ऐसे सव्यसाची अध्येता और अध्यापक हैं जो भाषाविज्ञान और साहित्य दोनों का एक साथ लक्ष्यवेध करने में समर्थ हैं .यही कारण है कि उनका लेखन न तो निरा भाषिक अध्ययन है और न मात्र भावयात्रा। इसका परिणाम यह हुआ है कि उनकी पुस्तकें भाषा केंद्रित होने के साथ-साथ अपनी परिधि में साहित्य को भली प्रकार समेटती हैं। यह विशेषता उनकी पुस्तक ‘भाषा, साहित्य और संस्कृति शिक्षण’ (2007) के अवलोकन से भी प्रमाणित होती है।

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