ASHA GUPT

बांग्ला भाषा से अनभिज्ञ हिन्दी पाठक इस तथा अन्य अद्वितीय कृतियों से महरूम न रह जाएँ इसलिए ‘काल वेला’(अशुभ वेला) जैसे उपन्यास का हिन्दी रूपान्तरण किया गया है । इस उपन्यास के अनुवाद में कोशिश यही रही है कि पाठकों को पढ़ते समय मूल का-सा आनन्द मिल सके । डॉ. आशा गुप्ता बांग्ला भाषा से विमल मित्र की बाई, विभूतिभूषण मुखोपाध्याय की ‘नीलम की अंगूठी’ गजेन्द्र कुमार मित्र का ‘परिचय नहीं पाया’ , सुनील गंगोपाध्याय के ‘एक दो तीन पक्षी’ ‘आधी रात का मनुष्य’ , ‘धूलिवसन’, सुशील राय का ‘सती दाह’ अनुवाद कर चुकी हैं ।

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