SHAMBUNATH

हिंदी के प्रतिष्ठित आलोचक। हिंदी विभाग, कलकत्ता विश्वविद्यालय में 1979 से 2014 तक अध्यापन। 2006-08 के बीच केंद्रीय हिंदी संस्थान, आगरा के निदेशक पद पर रहते हुए देश और विदेश में हिंदी के लिए विपुल कार्य। प्रमुख पुस्तकें: संस्कृति की उत्तरकथा (2000), धर्म का दुखांत (2000), दुस्समय में साहित्य (2002), हिंदी नवजागरण और संस्कृति (2004), सभ्यता से संवाद (2008), रामविलास शर्मा (2011), भारतीय अस्मिता और हिंदी (2012), कवि की नई दुनिया (2012), राष्ट्रीय पुनर्जागरण और रामविलास शर्मा (2013), उपनिवेशवाद और हिंदी आलोचना (2014), प्रेमचंद का हिंदुस्तान: साम्राज्य से राष्ट्र (2014)। प्रमुख संपादन: जातिवाद और रंगभेद (1990), गणेश शंकर विद्यार्थी और हिंदी पत्राकारिता (1991), राहुल सांकृत्यायन (1993), आधुनिकता की पुनर्व्याख्या (2000), रामचंद्र शुक्ल के लेखों का बांग्ला अनुवाद ‘संचयन’ (1998), सामाजिक क्रांति के दस्तावेजश् (दो खंड, 2004), 1857, नवजागरण और भारतीय भाषाएँ (2007), भारतेंदु और भारतीय नवजागरण (2009), संस्कृति का प्रश्न: एशियाई परिदृश्य (2011), हिंदी पत्राकारिता: हमारी विरासत (दो खंड, 2012), शब्द का संसार (2012), प्रसाद और राष्ट्रीय मुक्ति आंदोलन (2013)।

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