SUSHIL KUMAR SINGH

सुशील कुमार सिंह 'सिंहासन खाली है' जैसे ख्याति प्राप्त नाटक के लेखक और 'बीबी नातियों वाली' जैसे मील के पत्थर धारावाहिक के निर्माता-निर्देशक सुशील कुमार सिंह ने कानपुर विश्वविद्यालय से बी. एस-सी. तक शिक्षा प्राप्त करने के बाद राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय, नयी दिल्ली से नाट्य-निर्देशक तथा भारतीय फ़िल्म एवं टी. वी. संस्थान, पुणे से फ़िल्म एवं टेलीविजन कार्यक्रम निर्माण-निर्देशन का विशेष प्रशिक्षण प्राप्त किया। देश के विभिन्न भागों में पचास से अधिक नाटकों का निर्देशन, अनेकानेक नाट्य-शिविरों का संचालन, निर्देशन, अनेक टी.वी. धारावाहिकों, सौ से अधिक टी. वी. नाटकों, टेलीफ़िल्मों, वृत्तचित्रों आदि का निर्माण-निर्देशन किया। पूर्णकालिक नाटक : सिंहासन ख़ाली है, नागपाश, गुडबाई स्वामी, चार यारों की यार, अँधेरे के राही, बापू की हत्या हज़ारवीं बार, आज नहीं तो कल, आचार्य रामानुज, बेली तुम नादान, अलख आज़ादी की। नौलखिया दीवान,' नवीन नाटक है। 'ठग ठगे गये,' 'लोककथा कनुए नाई की, 'सुबह गयी है आय, वैसे तो सब खैर कुशल है,' 'विश्व-भ्रमण,' 'बापू के नाम बाल नाटिकाएँ, 'बाल लोक नाटिकाएँ,' आदि अनेक बाल नाटक भी लिखे हैं।

SUSHIL KUMAR SINGH