VINEET KUMAR

टीवी का कट्टर दर्शक। संवेदना और सरोकार की दुनिया में करियर बनाने की नीयत से मीडिया और साहित्य की मिली-जुली पढ़ाई। इस दौरान बेरोजगारी की मार से बचने के लिए अनुवाद का खुदरा काम। जमाने से कुछ हटके करने की चाहत में हिन्दी विभाग, दिल्ली विश्वविद्यालय से एफ एम चैनलों की भाषा पर एम. फिल. (2005)। ‘आजतक’ से मीडिया का ककहरा सीखने के बाद ‘जनमत न्यूज’ में पहली नौकरी। सीएसडीएस-सराय की स्टूडेंट फेलोशिप (2007) से निजी समाचार चैनलों की भाषा पर रिसर्च। यूजीसी-जेआरएफ की सफलता के बाद अकादमिक दुनिया में वापसी। लिखने का चस्का गाहे बगाहे और मोहल्ला ब्लॉग से। अपने ठिकाने ‘हुंकार’ के जरिए न्यू मीडिया, रेडियो और टीवी को एक कल्चरल टेक्स्ट के रूप में देखने-समझने की कोशिश। मीडिया और हिन्दी पब्लिक स्फीयर के बदलते मिजाज पर पिछले पांच सालों से लगातार टिप्पणी। मोहल्लालाइव, मीडियाख़बर, जनसत्ता के लिए नियमित लेखन। टीवी की दुनिया पर तहलका में ‘टेलीस्कोप’ नाम से कॉलम। फिलहालः दिल्ली विश्वविद्यालय से ‘मनोरंजन प्रधान चैनलों की भाषा एवं सांस्कृतिक निर्मितियां’ पर रिसर्च।

VINEET KUMAR