हिन्दी की अनस्थिरता: एक ऐतिहासिक बहस

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ISBN:81-7055-296-6

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हिन्दी में तर्क और विचार के सहारे भाषा और साहित्य सम्बन्धी विषयों पर गम्भीर बहसों की पुरानी परम्परा रही है। अनेक ऐसी बहसों के हवाले मिलते हैं जो हिन्दी के इतिहास में दर्ज हो चुक हैं। ऐसी ही एक ऐतिहासिक बहस हिन्दी के तीन महान् उन्नायकों-महावीरप्रसाद द्विवेदी, बालमुकुन्द गुप्त और गोविन्द नारायण मिश्र के बीच हिन्दी भाषा के मानक स्वरूप और उसके व्याकरण को लेकर सन् 1905-6 में हुई थी। यह पुस्तक इसी ऐतिहासिक बहस का संयोजन है, जिसमें ‘सरस्वती’ में प्रकाशित द्विवेदीजी के तीन निबन्ध, ‘भारत मित्र’ में प्रकाशित गुप्तजी के चार निबन्ध और हिन्दी ‘बंगवासी’ में प्रकाशित गोविन्द नारायण मिश्र का बहुचर्चित निबन्ध ‘आतराम की टें टें’ अविकल रूप से संकलित हैं। कहना न होगा कि वे सभी निबन्ध हिन्दी भाषा और व्याकरण पर केन्द्रित हैं; और सभी अन्योन्याश्रित रूप से सम्बद्ध भी हैं। हिन्दी भाषा और साहित्य के सुधी पाठकों को इस पुस्तक से जहाँ विचार और चिन्तन के नये सूत्र-सन्दर्भ मिलेंगे, वहीं पुरानी हिन्दी की आकर्षक और अद्वितीय भंगिमाओं से साक्षात्कार का भी सुख मिलेगा।

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AACHARYA MAHAVIR PRASAD DIVEDI

AACHARYA MAHAVIR PRASAD DIVEDI महावीर प्रसाद द्विवेदी जन्म : 15 मई 1864 जिला रायबरेली के दौलतपुर नाम ग्राम में। आधुनिक हिन्दी साहित्य को समृद्धशाली बनाने का श्रेय आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी को जाता है। महावीर प्रसाद द्विवेदी जी की प्रारम्भिक शिक्षा गाँव की पाठशाला में ही हुई। आर्थिक स्थिति प्रतिकूल होने के कारण घर पर ही संस्कृत, हिन्दी, मराठी, अंग्रेजी और बंगला भाषा का गहन अध्ययन । शिक्षा के पश्चात् रेलवे की नौकरी छोडकर ' सरस्वती ' के संपादन संभाल लिया। प्रमुख रचनाएं काव्यग्रह: काव्यमंजूषा, कविता कलाप, सुमन निबन्ध: सौ से भी अधिक निबंध जो सरस्वती तथा अन्य पत्र-पत्रिकाओं में प्रकाशित हुए। अनुवाद: संस्कृत और अंग्रेजी दोनो भाषाओं से अनुवाद कार्य, कुमारसंभव, वेकन विचार, मेघदूत, विचार रचनावली, स्वाधीनता आदि। आलोचना: नाटकशास्त्र, हिन्दी नवरत्न, रसज्ञ-रंजन, विचारविमर्श, कालिदास की निरंकुशता, साहित्य सन्दर्भ आदि। सम्पादन: सरस्वती मासिक पत्रिका। निधन: 21 दिसम्बर, 1938 --

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