मसावात की जंग पसेमंजर: बिहार के पसमांदा मुसलमान

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-493-4

लेखक:अली अनवर

Pages:264

मूल्य:रु250/-

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Details

भारत में सामाजिक न्याय की अवधारणा अब भी कितनी अधूरी है, यह जानने के लिए इस शोध कृति को पढ़ना जरूरी है। आम तौर पर माना जाता है कि जाति व्यवस्था हिन्दू समाज में ही है और मुसलमान इस सामाजिक बुराई से मुक्त हैं। मंडल आयोग ने इस मिथक को पहली बार तोड़ा-पिछड़ी जातियों की उसकी सूची में मुसलमान भी थे। पिछड़ी जातियों के इन मुसलमानों को तो आरक्षण मिल गया लेकिन एक और मिथक टूटने की प्रतीक्षा कर रहा था जिसके अनुसार दलित वर्ग सिर्फ हिन्दू समाज का कलंक है। दरअसल हुआ यह है कि भारत में आकर इस्लाम ने भी अपना भारतीयकरण कर लिया, जिसके नतीजे में उसने हिन्दू समाज की अनेक बुराइयाँ अपना लीं। अन्यथा यहाँ के मुस्लिम समाज में हलालखोर, लालनेगी, भटियारा, गोरकन, बक्खो, मीरशिकार, चिक, रंगरेज नट आदि दलित जातियाँ न होतीं।

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About the writer

ALI ANWAR

ALI ANWAR पत्रकारिता के क्षेत्र में अली अनवर के नाम से मशहूर । वास्तविक नाम अनवर अली । करखनिया मजदूर जनाब अब्दुल मन्नान अंसारी के ज्येष्ठ पुत्र श्री अनवर अली का जन्म, 16 जनवरी 1954 को पुराने शाहाबाद जिला ( अब बक्सर जिला ) के डुमरांव में हुआ । 1967 में ‘पढ़ाई नहीं तो फीस नहीं’ शीर्षक परचा छपवाने के कारण राज हाईस्कूल डुमरांव से निष्कासन । यहीं से निजी प्रबन्धन या यूँ कहें की डुमरांव राज के सामन्ती धाक के खिलाफ छात्र आन्दोलन की राजनीति रहनुमाई । आगे चलकर वामपंथी की शुरुआत । घर की मालीहालत खराब। 1974 में सरकारी नौकरी । इसी दौर में पत्रकारिता का चस्का । 1984 में सरकारी नौकरी से इस्तीफा । राजधानी पटना आकर ‘जनशक्ति’ के माध्यम से मिशन पत्रकारिता की शुरुआत । जनशक्ति बन्द हो जाने पर नवभारत टाइम्स पटना, जनसत्ता दिल्ली तथा स्वतन्त्र भारत लखनऊ के लिए पत्रकारिता । मुख्यधारा की पत्रकारिता के मधायम से भी साम्प्रदायिक और सामन्ती मानसिकता विरोधी स्वर, दबे-कुचलों की आवाज को प्रमुखता ।

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