कबीर एवं तुलसी की सामाजिक दृष्टि का तुलनात्मक अध्ययन

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ISBN:81-7055-279-6

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कबीर एवं तुलसी की सामाजिक दृष्टि का तुलनात्मक अध्य्ायन पुस्तक इन दो बड़े कवियांे पर एक और आलोचना पुस्तक नहीं, बल्कि हिन्दी के भक्ति साहित्य्ा के अध्य्ायन की एक नयी दिशा की संकेतक है। इसमंे विषयवस्तु के स्तर पर कबीर और तुलसी की सामाजिक दृष्टि को तुलना का विषय जरूर बनाया गया है, लेकिन यह अध्य्ायन मात्रा दो कवियों की तुलना तक ही सीमित न रह कर भक्ति की निर्गुण और सगुण धाराओं के माध्य्ाम से दो परस्पर विरोधी सामाजिक-सांस्कृतिक शक्तियांे की टकराहट को भी रेखांकित करता है। इस प्रक्रिया मंे सरिता राय ने भक्ति काल के सामाजिक अंतर्विरोधांे के स्वरूप को उद्घाटित करते हुए कबीर और तुलसी को दो विशेष व्य्ाक्तित्वों के रूप मंे प्रस्तुत न कर तत्कालीन समाज व्य्ावस्था के द्वंद्वात्मक ढाँचे मंे एक-दूसरे से लोहा लेती दो विरोधी वर्ग शक्तियांे, दो विरोधी मतांे तथा दो विरोधी आग्रहों-अनुरोधांे का मानचित्रा भी प्रस्तुत किया है। युवा आलोचक का स्पष्ट निष्कर्ष यह है कि कबीर ज्य्ाादा आधुनिक तथा प्रगतिशील हैं, जबकि तुलसी के साहित्य्ा मंे अनेक प्रतिक्रियावादी तत्व दिखाई देते हैं। आज के संदर्भ मंे कबीर और तुलसी की प्रासंगिकता के मूल्य्ाांकन की दृष्टि से यह एक उल्लेखनीय कृति है। इससे भक्ति काल के अध्य्ायन की एक नई खिड़की खुलती है।

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