शिक्षा की परिधि बाहर-भीतर

Format:Hard Bound

ISBN:81-8143-330-0

लेखक:अमिता शर्मा

Pages:120

मूल्य:रु150/-

Stock:Out of Stock

Rs.150/-

Details

स्कूल समानता के भाव को पारस्परिक व्यवहार में विकसित करने का स्थान बन सके: इस दिशा में पाठ्यचर्या किस प्रकार से प्रभावी उपकरण बन सकती है? अधिकतर राज्यों की पाठ्यचर्याओं के परीक्षण से पता चलता है कि पाठ्यक्रम लैंगिक समानता के मुद्दे को इस प्रकार से सम्बोधित करने की ओर प्रवृत्त होता है जिससे उसकी उपस्थिति पाठ विषयक सरोकार बन कर रह जाए; इसकी शब्दावली अपेक्षाकृत एकांगी होती है जो कि व्यवहार सम्बन्धी परिवर्तन की चिन्ता को खामोश कर देने की ओर प्रवृत्त होती है। पाठ्यचर्या का कार्यभार इस तथ्य के द्वारा आगे और जटिल हो जाता है कि लिंग का मुद्दा स्कूल के बाहर एक बृहत् सन्दर्भ में स्थित होता है और जिस तरह वह प्रभावित होता है, वह पूरी तरह से स्कूल की पाठ्यचर्या के नियंत्रण के भीतर नहीं होता है। सन्दर्भ का आशय यहाँ शैक्षणिक संस्थागत ढाँचों एवं प्रक्रियाओं और उनके परे सामाजिक-आर्थिक एवं राजनीतिक संस्कृति है।

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About the writer

AMITA SHARMA

AMITA SHARMA अमिता शर्मा का जन्म 1955,में इलाहाबाद में हुआ |एम. ए (अंग्रेज़ी )राजस्थान विश्वविद्यालय से |रजिस्थान विश्वविद्यालय में अध्यापन | समकालीन साहित्य और सेद्धांतिक समीक्षा में रुचि |

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