ए कार्स इन हिन्दी

Format:Paper Back

ISBN:978-8143-340-8

लेखक:डॉ. पी. जयरामन

Pages:190

मूल्य:रु450/-

Stock:In Stock

Rs.450/-

Details

A COURSE AN HINDI

Additional Information

"A COURSE IN HINDI" - (Hindi Text Book): This book is meant for those who wish to speak Hindi language as well as for those who would also desire to write and read the language in its own script (Devanagari script). As the learners of the language will not be, in the beginning, familiar with the Hindi script, they are introduced to the language through the Roman script. Our intention is that the students should be encouraged to speak first which will create in them a confidence. Then they should be slowly introduced to learn the language in its own script. They will themselves realize that for the correct accent (pronunciation of sounds) in Hindi, one should know the script with its proper pronunciation The book also concentrates on the teaching of correct grammatically correct language. With this intention, the grammar rules have been explained in brief and at times in detail. Of course, the sole objective of the book is to make students feel comfortable communicating in Hindi and understanding the language. The book is divided into three parts - Session I for beginners, Session II (intermediate level) and Session III ( advanced level), each part having 10 lessons. It is believed that the book written based on practical class experience, will make students have a good taste of language, speak the language in different situations and slowly move on to write and read. Therefore all lessons have been given in both scripts - Roman & Devanagari.

About the writer

DR. P. JAYARAMAN

DR. P. JAYARAMAN संस्कृत, हिन्दी एवं तमिल साहित्य के विद्वान; भारतीय संस्कृति तथा साहित्य की एकात्मता के प्रति समर्पित अठारह वर्ष तक अध्ययन कार्य में रत; बैं¯कग क्षेत्र में जन-सामान्य के हित के लिए भारतीय भाषाओं, विशेषकर हिन्दी के प्रचार-प्रसार हेतु भारतीय रिज़र्व बैंक के प्रबंध तंत्र में सोलह वर्ष तक कार्यरत; 1980 में न्यू यार्क में भारतीय विद्या भवन की स्थापना कर विगत उनतीस वर्षों से अमेरिका में भारतीय संस्कृति, परम्परा, दर्शन, भाषा, साहित्य एवं कलाओं के प्रचार-प्रसार में संलग्न। शैक्षणिक योग्यता - एम.ए. (संस्कृत तथा हिन्दी); पीएच.डी., डी.लिट्. प्रमुख प्रकाशन – 1.कवि सुब्रमणिय भारती तथा सूर्यकांत त्रिपाठी निराला के काव्य का तुलनात्मक अध्ययन (पीएच.डी. का शोध प्रबन्ध)। 2.कवि श्री भारती (सुब्रमणिय भारती की चुनी हुई कविताओं का हिन्दी रूपान्तर)। 3.पुरनानूरु (प्राचीन तमिल काव्य) की कथाएँ। 4.स्व. अखिलन के तमिल उपन्यास ‘चित्तिरप्पावै’ का हिन्दी रूपान्तर ‘चित्रित प्रतिमा’ के नाम से (नेशनल बुक ट्रस्ट द्वारा प्रकाशित)। 5.तमिल-हिन्दी स्वयं शिक्षक (के. हि. निदेशालय का प्रकाशन)। 6.चिन्मय काव्य (योगी श्री चिन्मय की चुनी हुई अंग्रेज़ी कविताओं का हिन्दी पद्य रूपान्तर)। 7.जैन धर्म, स्वामी विवेकानन्द तथा आधुनिक भारत के निर्माताओं पर अंग्रेज़ी में संपादित ग्रंथ। 8.शिलम्बु (तमिल नाटक - प्राचीन तमिल काव्य शिलप्पधिकारम् पर आधारित) 9.भक्ति के आयाम; वाणी प्रकाशन। सम्मान - साहित्य वाचस्पति (हिन्दी साहित्य सम्मेलन, प्रयाग); साहित्य भूषण (उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान); हिन्दी भाषा एवं साहित्य की सेवा के लिए केन्द्रीय हिन्दी संस्थान, आगरा द्वारा प्रदत्त सम्मान (2006); प्रवासी भारतीय सम्मान, भारत सरकार द्वारा प्रदत्त 2007; पद्मश्री, भारत सरकार द्वारा प्रदत्त (2009)। अन्य सेवायें: आकाशवाणी, मद्रास एवं बंबई में वार्ताकार तथा दूरदर्शन, बंबई में ‘संचयिता’ के नाम से पाक्षिक पत्रिका-कार्यक्रमों के प्रस्तोता (सन 1980 तक)

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