तीन सौ रामायण

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-172-8

लेखक:ए.के. रामानुजन

Pages:80

मूल्य:रु125/-

Stock:In Stock

Rs.125/-

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तीन सौ रामायण

Additional Information

तीन सौ रामायण बहुभाषाविद, लोकवार्ताकार,अनुवाद, कवि और अध्यापक रामानुजन द्वारा संसार में रामकथा की अद्भुत विविधतापूर्ण व्याप्ति और इसके भीतर छिपे अर्थ -संसार के विराट -संभावना लोक का अत्यंत ही संवेदनशील दृष्टि से किया गया उदघाटन है। सहस्रों वर्षों से अनेकानेक संस्कृतियों की अनेक पीढियां धर्मों की बाधाओं से परे इस कथा में अपने जीवन अर्थों का सृजन करती आई हैं। यह देख कर आश्चर्य होता है कि इस कथा में कितना लचीलापन रहा है। रामानुजन इस लेख में राम-कथा की विविधता के माध्यम से अर्थ-निर्माण और अनुवाद की प्रक्रिया पर भी विचार करते हैं।

About the writer

A. K. RAMANUJAN

A. K. RAMANUJAN ए.के. रामानुजन (1929-1998) का जन्म मैसूर के एक कन्नड़-भाषी तमिल परिवार में हुआ था। उन्होंने अंग्रेजी की शिक्षा मैसूर विश्वविद्यालय और इंडियाना यूनिवर्सिटी में ली। यूनिवर्सिटी ऑव शिकागो में विलियम ई. कोल्विन प्रोफेसर के रूप में काम करते हुए उनकी अकादमिक रुचियाँ अधिकाधिक अंतरानुशासनिक होती गईं। उन्होंने क्लासिकल तमिल और मध्यकालीन कन्नड़ से अनुवाद किये। उन्होंने कन्नड़ में प्रयोगशील कविता (होक्कुलाल्ली हुविल्ला, कुंतोबिल्ले, आदि) लिखी, भारत भर से लोकगाथाएँ एकत्र की, अंग्रेजी से कन्नड़ में और कन्नड़ से अंग्रेजी में कथा-साहित्य का अनुवाद किया और खुद कन्नड़ में एक उपन्यासिका लिखी। साहित्यिक उपलब्धियों के लिए उन्हें अनेक पुरस्कार और सम्मान मिले।

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