अस्तित्ववाद से गांधीवाद तक

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ISBN:81-7055-400-4

लेखक:मस्तराम कपूर

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मूल्य:रु295/-

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इस समय सारे विश्व में विचारों की शून्यता अनुभव की जा रही है। गत दो-तीन शताब्दियों में पश्चिमी समाज को छोड़कर बाकी सभी समाजों के विचारों का क्रम रुका था। अब पश्चिमी समाज में भी यह क्रम रुक गया है। पश्चिमी सभ्यता, जिसकी पूंजीवाद और साम्यवाद दो प्रमुख धाराएं, थीं, शक्तिशाली की उत्तरजीविका, प्रकृति के विनाश से जुड़ी विकास की कल्पना, उपभोगवाद और हथियारी बल की मूल अवधारणाओं पर टिकी थी। इन सारी अवधारणाओं पर प्रश्नचिह्न लग गया है। अतः वहाँ इतिहास के अन्त तथा विचारों के अन्त की बातें होने लगी हैं। भारत में भी अधिकतर इन्हीं विचारधाराओं को अपनाया गया अतः यहाँ भी विचारों का संकट उपस्थित हुआ है। 19 वीं और 20 वीं सदी में पश्चिमी सभ्यता को चुनौती देनेवाले अस्तित्ववादी दार्शनिकों तथा गांधी-लोहिया के विचारों के परिप्रेक्ष्य में उभरती हुई नई मानव-सभ्यता के प्रमुख बिन्दुओं को तलाशने का प्रयास है यह पुस्तक।

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MASTRAM KAPOOR

MASTRAM KAPOOR जन्म: 22 दिसंबर, 1926, सकड़ी (हिमाचल प्रदेश) प्रमुख रचनाएं उपन्यासः विपथगामी, रास्ता बंद काम चालू, नाक का डॉक्टर, एक सदी बांझ (उपन्यास-त्रयी) कहानी-संग्रह: एक अदद औरत, ग्यारह पत्ते, ब्रीफकेस। नाटक: पत्नी ऑन ट्रॉयल, सांप आदमी नहीं होता। कविता: कूड़ेदान से साभार। निबंध: हम सब गुनहगार, समसामयिक प्रतिक्रियाएं, पं. चन्द्रधर शर्मा ‘गुलेरी’, साहित्यकार का संकट, राष्ट्रीय एकता का संकट और साम्प्रदायिक शक्तियाँ, मंडल रिपोर्ट ‘ वर्णव्यवस्था से समाजवादी व्यवस्था की ओर, साम्यवादी विश्व की विघटन और समाजवाद का भविष्य आदि। बाल साहित्य: किशोर जीवन की कहानियां (दो भाग), निर्भयता का वरदान, दंड का पुरस्कार, आजा-होजा, सहेली, नीरू और हीरू, संपेरे की लड़की, भूतनाथ, चोर की तलाश, एंेगा-बेंगा, बेजुबान साथी, सुनहरा मेमना, एक भी चिड़िया (कहानी उपन्यास), स्पर्धा, बच्चों के एकांकी, बच्चों के नाटक, पांच बाल एकांकी (नाटक)। अनुवाद: ग्यारह तुर्की कहानियां, आंध्र प्रदेश: लोक-संस्कृति और साहित्य, डॉ. आम्बेडकर: एक चिंतन, सरदार पटेल: व्यवस्थित राज्य के निर्माता, एशिया के बाल नाटक, स्वामी और उसके दोस्त, अर्थशास्त्र का परिचय आदि।

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