विधाओं का विन्यास

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-461-3

लेखक:अनंत विजय

Pages:184

मूल्य:रु375/-

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Rs.375/-

Details

अनंत विजय के नाम से हिन्दी के सुधी पाठक अवश्य परिचित होंगे। पैतृक संस्कार के कारण पहले वे साहित्य की दुनिया में आये और फिर बाद में पत्रकारिता की ओर मुड़े लेकिन अब भी साहित्य उनसे छूटा नहीं है। आजकल वे एक बड़े प्रतिष्ठित चैनल IBN7 से जुड़े हैं। लेकिन एक अच्छी बात यह है कि अब भी वो साहित्यिक सवालों और विवादों में हस्तक्षेप करते हैं। हिन्दी की प्रतिष्ठित मासिक पत्रिका हंस और नया ज्ञानोदय में वो लिखते रहते हैं। यह यूँ ही नहीं है कि हंस के सम्पादक राजेन्द्र यादव अपने सम्पादकीय में अनंत विजय का उल्लेख देशी-विदेशी अंग्रेजी लेखकों की अद्यतन पुस्तकों को पढ़नेवाले के तौर पर याद करते हैं। अनंत विजय में आधुनिक हिन्दी साहित्य के विकास और इतिहास की अच्छी समझ है। बड़ी बात यह है कि हिन्दी पाठकों के सामने अंग्रेजी लेखकों के माध्यम से एक बड़ी दुनिया के यथार्थ से हमारा परिचय करा रहे हैं। साहित्यिक संस्कार के कारण वे बड़े से बड़े अंग्रेजी लेखकों से कभी आतंकित नहीं होते और उनकी भूल-गलतियों पर बेहिचक उँगुली रखते हैं। और सही जगह पर। उनके लेखन की यह विशेषता है कि वो जटिल और दुर्बोध अंग्रेजी लेखक की रचना को भी अपार धैर्य और साहस के साथ पढ़कर हिंदी पाठकों के लिए पठनीय ही नहीं बनाते हैं, बल्कि उसमें समीक्षित पुस्तक के प्रति उत्सुकता भी जगाते हैं। प्रस्तुत पुस्तक में संकलित अंग्रेजी पुस्तकों - विशेषतः आत्मकथा और जीवनी पर केन्द्रित पुस्तकों की समीक्षाएँ इस बात का प्रमाण हैं कि लेखन के प्रति उनकी अगाध निष्ठा है और जो कुछ अच्छा वो अनायास पढ़ते हैं, उसे पाठकों से शेयर करते हैं। उनके लेख से पाठकों के सामने एक नयी दुनिया खुलती है जो बेहद आह्लादक है।

Additional Information

राजेन्द्र यादव का कहना है - दिल्ली में अगर कोई हिन्दी-अंग्रेजी की नयी से नयी किताबों को पढ़ने या सूँघने वाले व्यक्ति का नाम पूछे तो मेरी ज़बान पर बेसाख़्ता आता है, अनंत विजय। वे पढ़ते ही नहीं हैं अजीब और अछूते सवाल भी उठाते हैं। पिछले छह महीने से धमकी दे रहे हैं कि वे हिन्दी कथा साहित्य में उन लेखिकाओं या कथा-स्थितियों पर लिखना चाहते हैं जहाँ लेखिका ने स्त्री की कामेषणाओं को वाणी दी है। वे सेक्सुएलिटी, सेंसुएलिटी, इरोटिका, सेक्स डिज़ायर और ऐसे ही ऊटपटाँग शब्दों के पर्याय ही नहीं, इनके बारीक भेदों को व्यक्त करनेवाले संकेतों के हिन्दी शब्दों की बात भी करते हैं। अब यह मेरी असमर्थता है या कामसूत्र के देश में, सचमुच स्त्री की इन कामनाओं को बारीकी से समझने की कोशिश ही नहीं की गयी, इसलिए शब्द भी नहीं हैं।

About the writer

ANANT VIJAY

ANANT VIJAY अनंत विजय का जन्म 19 नवम्बर 1969 को हुआ। स्कूली शिक्षा जमालपुर (बिहार) में प्राप्त की। भागलपुर विश्वविद्यालय से बीए ऑनर्स (इतिहास) किया, दिल्ली विश्वविद्यालय से पत्राकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट सर्टिफिकेट, बिजनेस मैनेजमेंट में पोस्ट ग्रेजुएट डिप्लोमा, पत्राकारिता में पोस्ट ग्रेजुएट की शिक्षा प्राप्त की। अनंत विजय की प्रसंगवश, कोलाहल कलह में, लोकतंत्र की कसौटी, बॉलीवुड सेल्फी आदि प्रकाशित कृतियाँ हैं। नया ज्ञानोदय, पुस्तक वार्ता, चौथी दुनिया में स्तम्भ लेखन किया है। न्यूज चैनल में एक दशक से अधिक समय बिताकर इन दिनों दैनिक जागरण में एसोसिएट एडीटर हैं।

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