लेनिन और गाँधी

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-8143754-9

लेखक:यशपाल

Pages:

मूल्य:रु595/-

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Rs.595/-

Details

लुई फिशर की ‘लेनिन और गाँधी’ सन् 1927 में प्रकाशित हुई थी। आधारभूत विचाराधात्मक भिन्नता के बावजूद बीसवीं शताब्दी मुख्यतः इन दो व्यक्तियों की शताब्दी ही रही है। यूरोप ने साम्यवाद के उस मॉडल को सदैव आशंका की दृष्टि से देखा जिसकी स्थापना लेनिन के नेतृत्व में रूस में की गई। लुई फिशर यह मानते हैं कि वह दुनिया में कहीं भी एक नए ढंग की राज्य-व्यवस्था थी जिसके मूल्यांकन के लिए कसौटी भी नई चाहिए। गाँधी उस बोल्शेविज्म के कटु विरोधी थे- उसमें हिंसा की भूमिका और खुली स्वीकृति को देखते हुए। इसे भी लुई फिशर छिपाते नहीं हैं कि गाँधी के बहुत से आतार्किक विचारों और जीवन में उनके अमल से उनकी सहमति नहीं है। लुई फिशर ने, एक जीवनीकार के लिए आवश्यक, गहरी आत्मीयता एवं वस्तुपरकता से दो विपरीत ध्रुवों को साधने की कोशिश की है। इन दोनों में उन्होंने कुछ ऐसे समान सूत्रों की खोज की है, दलित-वंचित जनता के प्रति गहरी संलग्नता, अदम्य आशावाद, कला की सामाजिक भूमिका, सादगी और आदर्श का समन्वय और सबसे अधिक उनकी क्रियात्मक विचारशीलता। दोनों का ही जीवन किसी किताब की तरह खुला था- किसी बड़ी और गहरी नदी के स्वच्छ और पारदर्शी पानी की तरह।

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YASHPAL

YASHPAL यशपाल का जन्म 3 दिसम्बर, 1903 ई. में फ़िरोजपुर छावनी में हुआ था। इनके पूर्वज कांगड़ा ज़िले के निवासी थे और इनके पिता हीरालाल को विरासत के रूप में दो-चार सौ गज़ तथा एक कच्चे मकान के अतिरिक्त और कुछ नहीं प्राप्त हुआ था। आरंभिक शिक्षा स्थानीय स्कूल में और उच्च शिक्षा लाहौर में पाई। इनकी माँ प्रेमदेवी ने उन्हें आर्य समाज का तेजस्वी प्रचारक बनाने की दृष्टि से शिक्षार्थ गुरुकुल कांगड़ी भेज दिया। गुरुकुल के वातावरण में बालक यशपाल के मन में विदेशी शासन के प्रति विरोध की भावना भर गयी। यशपाल विद्यार्थी काल से ही क्रांतिकारी गतिविधियों में जुट गए थे। अमर शहीद भगतसिंह आदि के साथ मिलकर इन्होंने भारतीय स्वतंत्रता आंदोलन में भाग लिया। यशपाल की प्रमुख कृतियाँ: देशद्रोही, पार्टी कामरेड, दादा कामरेड, झूठा सच तथा मेरी, तेरी, उसकी बात (सभी उपन्यास), ज्ञानदान, तर्क का तूफ़ान, पिंजड़े की उड़ान, फूलो का कुर्ता, उत्तराधिकारी (सभी कहानी संग्रह) और सिंहावलोकन (आत्मकथा)। मेरी, तेरी, उसकी बात' पर यशपाल को साहित्य अकादमी पुरस्कार मिला। यशपाल की कहानियों में सर्वदा कथा रस मिलता है। वर्ग-संघर्ष, मनोविश्लेषण और तीखा व्यंग्य इनकी कहानियों की विशेषताएँ हैं।

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