अपने अपने अज्ञेय.1

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ISBN:978-93-5000-916-1

लेखक:ओम थानवी

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मूल्य:रु750/-

Stock:In Stock

Rs.750/-

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अज्ञेय ने लिखा है समय कहीं ठहरता है तो स्मृति में ठहरता है। स्मृति के झरोखे में काफी कुछ छन जाता है। लेकिन इसी स्मृति को फिर से रचने की संभावनायें खड़ी होती हैं। झरोखों से छनती धूप की तरह वह स्मृति हमें गुनगुना ताप और उजास देती है। ऐसा लगता है मानो हम उस दौर से गुज़र रहे हों। पुस्तक के माध्यम से अपने-अपने अज्ञेय ऐसे ही संस्मरणों का संकलन है । व्यक्तिपरक संस्मरणों में जितना वह व्यक्ति मौजूद रहता है जिसके बारे में संस्मरण है, उतना ही संस्मरण का लेखक भी । यों तो कोई वर्णन या विवेचन शायद पूर्णतः निष्पक्ष नहीं होत, पर ऐसे संस्मरण तो हर हाल में व्यक्तित्व और उसके कृतित्व का विशिष्ट निरूपण ही करते हैं।

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About the writer

OM THANVI

OM THANVI ओम थानवी साहित्य, कला, सिनेमा, रंगमंच, पुरातत्त्व और पर्यावरण में गहरी रुचि रखते हैं। देश-विदेश में भ्रमण कर चुके हैं। बहुचर्चित यात्रा-वृत्तान्त मुअनजोडड़ो के लेखक हैं। अपने अपने अज्ञेय पुस्तक का मूलत: उद्देश्य सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' को श्रदांजलि अर्पित करना है। अज्ञेय के साथ ओम थानवी के पारिवारिक सम्बन्ध भी रहे हैं, थानवी जी अज्ञेय से मिलते रहते थे। एक लगाव से वह अज्ञेय को कितना समझ पाए और अज्ञेय के बारे में कितना संकलन कर पाए। इन्होंने इसका सही रूप 'अपने अपने अज्ञेय' पुस्तक के माध्यम से प्रस्तुत किया है।

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