चौपाल पे ताऊ

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-908-6

लेखक:संपादक डॉ. शमीम शर्मा

Pages:146

मूल्य:रु200/-

Stock:Out of Stock

Rs.200/-

Details

चौपाल पे ताऊ

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ताऊ मूढ़ों अथवा खाटों पर झुण्ड में बैठे बतियाते हुए, ताश खेलते हुए या हुक्का गुड़गुड़ाते हुए हरियाणा के गांवों में आम दिख जाते हैं। तख्त, ताश और हुक्के में हमारे ताऊ के प्राण बसते हैं। गाँवों में एक कहावत भी प्रसिद्ध है कि चौपाल की शोभा बूढ़ों से या मूढ़ों से...... ताऊ के लहज़े में एक सरलता और सहजता विद्यमान होती है। उसके तर्क बेमिसाल और अकाट्य होते हैं और अक्सर बेहद व्यंग्यात्मक भी। हरियाणवी ताऊ अनपढ़-मूढ़ न होकर एक चतुर, अनुभवी और बेबाक बात कहनेवाला स्पष्टवादी चरित्र है जो इस बात की रंच मात्र भी परवाह नहीं करता कि सुननेवाले को कैसा लगेगा। वह मन से साफ है और उदार भी, पर कहने से नहीं चूकता। समय पर अपनी बात कहना ही उसका धर्म है और मन में आई बात कहने का उसमें साहस भी है और यही उसका सबसे बड़ा चारित्रिक गुण है। मेरी धारणा है कि ताऊ की सहजता और भोलापन फूहड़ता हरगिज़ नहीं है। -पुस्तक की भूमिका से

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Ed. Dr. SHAMIM SHARMA

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