अज्ञेय: एक अध्ययन

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-391-9

लेखक:भोलाभाई पटेल

Pages:360

मूल्य:रु600/-

Stock:In Stock

Rs.600/-

Details

हिन्दी साहित्य के बीसवीं शताब्दी के इतिहास में ‘अज्ञेय’ सच्चिदानन्द हीरानन्द वात्स्यायन (1911-1988) एक अति महत्त्वपूर्ण और अपरिहार्य नाम है। प्रयोगवाद और नयी कविता को हिन्दी साहित्य में उन्होंने प्रतिष्ठित किया है। कविता के अतिरिक्त उपन्यास, कहानी, निबन्ध, समालोचना, पत्राकारिता, यात्रावृत्त आदि साहित्य की सभी विधाओं में उनका प्रदान अनन्य रहा है। अज्ञेय-साहित्य की एक विशेषता है उसमें अनस्यूत आधुनिकता का बोध। इस आधुनिकता बोध में भारत की साहित्यिक-सांस्कृतिक परम्परा के साथ पाश्चातय साहित्य तथा विचारधाराआंे का विलक्षण सामंजस्य है। इस पाश्चात्य सम्पर्क ने अज्ञेय को अधिक भारतीय लेखक बनाया है। इस ग्रन्थ में अज्ञेय के सर्जनात्मक साहित्यµकविता, उपन्यास और कहानी का आधुनिकता और पाश्चात्य प्रभावों के परिप्रेक्ष्य में अध्ययन प्रस्तुत किया गया है। अज्ञेय-साहित्य में इस प्रकार के नये अभिगम से समीक्षित करने का यह शायद प्रथम प्रयास है।

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BHOLABHAI PATEL

BHOLABHAI PATEL एम.ए. (हिन्दी-संस्कृत), एम.ए. (अंग्रेजी) पीएच.डी. (हिन्दी) 1960-’69 सरदार वल्लभभाई आटर््स कॉलेज में हिन्दी-संस्कृत का अध्यापन। 1969-’94 भाषा-साहित्य भवन, गुजरात युनि. से सम्बद्ध, पहले व्याख्याता तत्पश्चात् रीडर, प्रोफेसर तथा अध्यक्ष पद पर। 1983-’84 विश्वभारती, शान्ति निकेतन में तुलनात्मक भारतीय साहित्य के विजश्टिंग फेलो। 1996-’98 के.के. बिड़ला फाउंडेशन तुलनात्मक भारतीय साहित्य के फेलो। गुजराती समीक्षा, निबन्ध तथा यात्रावृत्त के क्षेत्रा में महत्त्वपूर्ण योगदानµअधुना, पूर्वापर, कालपुरुष, आधुनिकता और गुजराती कविता, साहित्यिक परम्परानो विस्तार आदि आलोचना ग्रन्थ; विदिशा, कंचनजंघा, शालभंजिका आदि निबन्ध संग्रह; पूर्वोत्तर, देवात्मा हिमालय, देवोनी घाटी आदि यात्रावृत्त। बंगला, असमिया, अंग्रेजी और हिन्दी से गुजराती में तथा गुजराती से हिन्दी में अनेक ग्रन्थों का अनुवाद; प्रमुख ग्रन्थµवनलतासेन, चार अध्याय, इयारुइंगम, समकालीन असमिया कविता; निशीथ-प्राचीना। 1989 में उत्तर प्रदेश हिन्दी संस्थान का सौहार्द पुरस्कार। 1992 में श्रेष्ठ गुजराती ग्रन्थ के लिए तथा 1998 में श्रेष्ठ अनुवाद के लिए साहित्य अकादेमी, दिल्ली द्वारा सम्मानित। ‘परब’µगुजराती साहित्य परिषद् की मासिक साहित्यिक पत्रिका के सम्पादक-मन्त्राी। गुजरात साहित्य परिषद् (गुजरात राज्य), गांधीनगर के अध्यक्ष भी रहे।

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