आलोचना और संस्कृति

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ISBN:81-8143-625-3

लेखक:अजय तिवारी

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मूल्य:रु350/-

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‘आलोचना और संस्कृति’ में साहित्य, राजनीति, समाज और संस्कृति के तमाम तालिबान मौजूद हैं। जो आम पाठक को सोचने-समझने समस्याएँ, सार्थक संवाद की संभावनाओं के साथ-साथ मौजूदा समय और समाज में निरंतर चल रही ‘मौन क्रांति’ की पूर्व सूचना भी हैं। समकालीन बौद्धिक चिन्तकों और विचारकों से वैचारिक असहमति प्रगट करने में यहाँ किसी प्रकार की कोई ‘रियायत’ या ‘लागलपेट’ नहीं दिखाई देती। ‘आलोचना और संस्कृति’ विचार-विमर्श की चिंतनधारा में एक महत्त्वपूर्ण और उल्लेखनीय हस्तक्षेप है। प्रतिभापूर्ण श्रम के बिना, ऐसी रचाओं की कल्पना भी असंभव है।

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AJAY TIWARI

AJAY TIWARI अजय तिवारी, जन्म: 6 मई, 1955, शिक्षा: इलाहाबाद से हाईस्कूल करने के बाद पी-एच.डी. तक दिल्ली विश्वविद्यालय से अध्ययन। पुस्तकंे: प्रगतिशील कविता के सौंदर्यमूल्य, कुलीनतावाद और समकालीन कविता, साहित्य का वर्तमान, पश्चिम का काव्य-विचार। संपादन: केदारनाथ अग्रवाल, कवि-मित्रों से दूर (केदारनाथ अग्रवाल के साक्षात्कार), आज के सवाल और मार्क्सवाद (रामविलास शर्मा से संवाद), तुलसीदास: एक पुनर्मूल्यांकन। सम्मान: केशव-स्मृति सम्मान, भिलाई (1996); देवीशंकर अवस्थी सम्मान, नयी दिल्ली (2002)। संप्रति: दिल्ली विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर।

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