भक्ति का संदर्भ

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ISBN:81-7055-535-3

लेखक:देवीशंकर अवस्थी

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मूल्य:रु150/-

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अपने समकालीन यथार्थ की सही पहचान रखनेवाला समीक्षक ही समकालीन साहित्य के साथ-साथ अतीत के साहित्य का भी वस्तुपरक मूल्यांकन कर सकता है। इस दृष्टि से देवीशंकर अवस्थी की यह पुस्तक सर्वथा नये प्ररिप्रेक्ष्य में भक्ति-साहित्य का आकलन प्रस्तुत करती है। देवीशंकर अवस्थी नवलेखन की संपूर्ण त्वरा और उसकी प्रवृत्तिगत विविधता पर जिस अधिकार के साथ अपनी बात कह रहे थे, उसी अधिकार के साथ एकदम आधुनिक संवेदना से ओत-प्रोत होकर भक्ति के संदर्भ और उसकी परंपरा पर भी विचार कर रहे थे। धर्मशास्त्र, तत्त्वमीमांसा, इतिहास और समाजविज्ञान के क्षेत्र में हो रहे नये अनुसंधानों के आलोक में भक्ति आंदोलन के बोधपक्ष और उसकी ऐतिहासिक क्रमिकता पर भी उन्होंने अपना ध्यान केंद्रित किया था। वैदिक संस्कृति और लोक में पहले से चली आ रही अवैदिक भावधाराओं के बीच की अंतःक्रियाओं को समझने के मामले में उनकी दृष्टि अचूक है। यही दृष्टि भक्ति साहित्य को सम्यक् संदर्भ प्रदान करती है।

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DEVISHANKAR AWASTHI

DEVISHANKAR AWASTHI जन्मः उत्तर प्रदेश के उन्नाव जिले के गाँव ‘सथनी बालाखेड़ा’ में 5 अप्रैल 1930।, शिक्षा: रायबरेयी और कानपुर, 1960 में आगरा विश्वविद्यालय से आ. हजारीप्रसाद द्विवेदी के निर्देशन में पी-एच.डी.। ‘यो लॉ की भी डिग्री’ ली थी।, कार्यक्षेत्र: अध्यापन: 1953 से 1961 तक डी.ए.वी. कॉलेज, कानपुर; 1961 से मृत्युपर्यनत...दिल्ली विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर हिंदी विभाग से सम्बद्ध।, रचनाएँ: मौलिक: 1. आलोचना और आलोचना, 2. रचना और आलोचना, 3. भक्ति का सन्दर्भ, 4. अठारहवीं शताब्दी के ब्रजभाषा काव्य में प्रेमाभक्ति, 5. ‘हमका लिख्यो है कहा’ (शीघ्र प्रकाश्य) (अवस्थी जी के नाम मित्रों के पत्र), संपादित: 1. कविताएँ 1954, 2. विवेक के रंग, 3. नयी कहानी: सन्दर्भ और प्रकृति, 4. कहानी विविधा, 5. साहित्य विधाओं की प्रकृति, संपादन: पत्रिका ‘कलजुरा’, निधन: दिल्ली, 13 जनवरी 1966 (एक सड़क दुर्घटना में)

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