हाली: कवि एक रूप अनेक

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ISBN:978-93-5000-198-1

लेखक:डॉ.एस. वाई. कुरैशी

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मूल्य:रु395/-

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मौलाना अलताफ़ हुसैन हाली यों तो पैदा हुए उन्नीसवीं सदी के मध्य में, लेकिन वे आदमी थे इक्कीसवीं सदी के! जो आदमी अपने समय से डेढ़-दो सौ साल आगे की सोचता हो, उसे आप क्या कहेंगे? क्या ऋषि नहीं? क्या स्वप्नदर्शी नहीं? क्या मौलिक विचारक नहीं? क्या क्रान्तिकारी नहीं? क्या प्रगतिशील नहीं? हाली ये सब कुछ थे। इसीलिए एस. वाई. कुरैशी ने इस पुस्तक का नाम दिया है, ‘कवि एक रूप अनेक’! हाली यों तो खुद मौलाना थे, लेकिन उन्होंने अपने गद्य में पोंगापंथी मौलानाओं और मौलवियों की जो खबर ली है, वह वैसी ही है, जैसी कभी कबीर ने ली थी। हाली के समकालीन महर्षि दयानन्द सरस्वती ने जैसे हिन्दू पोंगापंथियों को ललकारा था, लगभग वैसे ही हाली ने भी इस्लामी कट्टरवादियों को खुली चुनौती दी थी। कुरैशी की इस किताब की खूबी यह है कि हाली पर खुद उन्होंने एक लम्बा और विश्लेषणात्मक निबन्ध तो लिखा ही है, उस क्रान्तिकारी और महान शायर पर ऐसे विविध निबन्धों का संकलन किया है, जो उनके हर पहलू पर प्रकाश डालते हैं। इस पुस्तक को पढ़ने से पता चलता है कि मौलाना हाली कितने बड़े राष्ट्रवादी थे, निर्भीक और क्रान्तिकारी विचारक थे, उत्कृष्ट कोटि के शायर थे और अपने समय के सबसे ऊँचे समालोचक भी थे। कुरैशी ने हाली की जीवनी तो नहीं लिखी है, लेकिन उन्होंने हाली के लिए करीब-करीब वही काम कर दिखाया है जो खुद हाली ने सादी, गशलिब और सर सैयद अहमद के लिए किया था। यह संकलन इतना उम्दा है कि इसे पढ़ने पर साहित्य का रसास्वादन तो होता ही है, बेहतर इनसान बनने की प्रेरणा भी मिलती है। हाली थे ही ऐसे गज़ब के आदमी।

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About the writer

DR. S. Y. QURAISHI

DR. S. Y. QURAISHI भारत के निर्वाचन आयुक्त डॉ. कुरैशी का जीवन और कैरियर विविधरंगी रहा है। उन्होंने भारत में केन्द्रीय और राज्य दोनों स्तरों पर उल्लेखनीय कार्य करते हुए 35 वर्ष तक सिविल सेवा में विभिन्न जिम्मेदारियों का सक्षम निर्वाह किया। वे युवा गतिविधियों और खेल मंत्रालय के सचिव, राष्ट्रीय एड्स नियन्त्रण संगठन (एनएसीओ) के महानिदेशक और दूरदर्शन के महानिदेशक जैसे महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। डॉ. कुरैशी को भारत और विदेश दोनों ही में स्वास्थ्य, शिक्षा, जनसंख्या, नशा मुक्ति इत्यादि सामाजिक सुधार के कार्यों में विशेष योगदान देने के लिए पहचाना जाता है। पीएच. डी. के लिए इनके शोध प्रबन्ध का शीर्षक है: महिलाओं एवं बच्चों के विकास में संचार और सामाजिक विपणन की भूमिका। इनकी विख्यात पुस्तक ‘सोशल मार्केटिंग फॉर सोशल चेंज’ ने विकास संचार के नए आयाम उद्घाटित किए हैं। करनाल, हरियाणा में 1972 में काम करते हुए इन्होंने मौलाना हाली की स्मृतियों को जीवंत बनाने में महत्त्वपूर्ण योगदान किया। समाज और मानव विकास संबंधी कार्यों में योगदान के लिए डॉ. कुरैशी को अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है।

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