सार्थक शिक्षा की बुनावट

Format:Hard Bound

ISBN:81-88717-12-6

लेखक:

Pages:112

मूल्य:रु150/-

Stock:In Stock

Rs.150/-

Details

अन्तर्विरोधों और द्वन्द्वों की पड़ताल करने से यह पता चलता है कि लोगों की मुख्य चिन्ता शिक्षा की प्रासंगिकता है न कि शिक्षा की सुलभता। काफी सम्भव है कि सुलभता की समस्या का भी एक हद तक समाधान हो जाए यदि हम लोगों की असली जरूरतों के अनुसार शिक्षा में आवश्यक परिवर्तन कर दें। पर यह तभी सम्भव होगा जब हम लोगों की बातों को भी ध्यान में रखेंगे कि आमतौर पर भारतीय अपने को भिन्न ढंग से व्यक्त करते हैं। हम पश्चिम वालों की तरह जवाब नहीं देते। हमारे उत्तर देने का तरीका जरा घुमावदार होता है। कही हुई बात का यदि गहराई से परीक्षण नहीं किया जाएगा तो निष्कर्ष ऐसे भी आ सकते हैं जो उससे बिल्कुल उलटे हों जो कि वास्तव में कहा गया था।

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