साहित्य का पारिस्थितिक दर्शन

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-862-1

लेखक:के. वनजा

Pages:152

मूल्य:रु295/-

Stock:In Stock

Rs.295/-

Details

पिछले कुछ दशकों में दक्षिणात्य हिन्दी विद्वानों ने हिन्दी लोकवृत में एक नया स्पन्दन पैदा किया है। राग-द्वेष के गणित से दूर, सिर्फ पुस्तकों के आधार पर समकालीन हिन्दी रचनाकारों का मूल्यांकन वस्तुनिष्ठता का मानक है। डॉ. के. वनजा की यह पुस्तक उससे आगे की कड़ी है। अपने समय के एक प्रश्न (पर्यावरण-संकट) के आलोक में हिन्दी और मलयालम के कुछ प्रमुख लेखकों की कृतियों का प्रकृति-पक्ष रेखांकित करती हुई यह पारिस्थितिक दर्शन के चारों आयामों की सजग समीक्षा करती है। पूरी पुस्तक हरे प्रकाश से नहायी हुई है। पारिस्थितिक शास्त्र पर एक प्रामाणिक पुस्तक लिखकर वनजा ने वनदेवियों वाला तेज दिखाया है।

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About the writer

K. VANJA

K. VANJA के. वनजा जन्म: 15 नवम्बर, 1959 शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी), पीएच.डी., डी.लिट. (हिन्दी)। प्रकाशित पुस्तकें: साहित्य का पारिस्थितिक दर्शन (पर्यावरण), इको-फेमिनिज्श्म (स्त्राी विमर्श), माखनलाल चतुर्वेदी की रचनाओं में मानव मूल्य (आलोचना), तुलना और तुलना (तुलनात्मक अध्ययन), हिन्दी उपन्यास आज (आलोचना), समीक्षा का साक्ष्य (आलोचना), चित्रा मुद्गल: एक मूल्यांकन (आलोचना), भारत की विभिन्न पत्रा-पत्रिकाओं में अनेक लेख। सम्प्रति: कोच्ची विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के हिन्दी विभाग में प्रोफेसर। सम्पर्क: अभिरामम, सुरभी रोड, इडप्पल्ली- पी.ओ., कोच्ची-682024। मोबाइल: 09495839796

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