कविता के पते-ठिकाने

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-711-9

लेखक:विजय कुमार

Pages: 231

मूल्य:रु495/-

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Rs.495/-

Details

कविता के पते-ठिकाने

Additional Information

कवि-आलोचक विजय कुमार की हिन्दी आलोचना के वर्तमान परिदृश्य में एक महत्त्वपूर्ण उपस्थिति है। उनकी पस्तक 'कविता की संगत' ने समकालीन हिन्दी कविता की प्रवृत्तियों और उनके निहिताथों को समझने की एक गम्भीर पीटिका को रचा था। यह कविता-विमर्श की दुनिया में एक रचनाकार की विचारोत्तेजक और सृजनात्मक आलोचकीय दृष्टि का दखल था। उन्होंने रचना और आलोचना के रिश्तों को एक नयी हार्दिकता प्रदान की। उसी कड़ी में अपनी इस ताजा पुस्तक में। उन्होंने पिछले दो दशकों में भारतीय समाज में घटित परिवर्तनों और इस दौर में लिखी गयी कविता की जिस प्रकार से विवेचना की है, वह एक बड़ी तैयारी, राग, जतन और ज़िम्मेदारी के बल पर ही सम्भव था। एक काव्य विरोधी होते जाते समय में यहाँ कविता के उन पते-ठिकानों की एक विकल खोज है, जो अभी भी हमारी इस दुनिया में बचे हुए हैं और उन तक पहुँचा जा सकता है। कविता पर लिखे इन निबन्धों में हमारे समय के जो दार्शनिक और सामाजिक फलितार्थ हैं, उन्हें समझने की कोशिश है। उपभोग और उन्माद के समय में कविता को एक नैतिक हस्तक्षेप मानते हुए विजय कुमार ने मूल्य निर्णय देने की अधीरता दिखाने के बजाय रचना और उसके निहितार्थों को व्यापकतम सन्दर्भो में समझने और पाठकों तक पहुँचाने का प्रयास किया है। उनकी भूमिका सावधानीपूर्वक एक सहृदया सहचर और तटस्थ विश्लेषक की है। विजय कुमार ने इस बात को रेखांकित करते हुए कि किसी रचना का मूल्य इसमें है कि वह इस युग में अपनी उपस्थिति को किस तरह दर्ज कराती है, अपनी आलोचकीय दृष्टि का परिसर निरन्तर विस्तृत और गहन बनाने का उद्यम किया है। उनके यहाँ कविता केन्द्र में है और आलोचना उसकी संगत है। बिना किसी शोर-शराबे के उन्होंने धारदार और जिम्मेदार आलोचनात्मक लेखन किया है। एक संवेदनशील पाठक जो भारतीय समाज में तेजी से छंटते परिवर्तनों के सन्दर्भ में समकालीन रचना परिदृश्य की जटिलताओं और चुनौतियों को बृहत्तर धरातल पर 'देखना-समझना चाहता है, उसके लिये यह एक अनिवार्य पुस्तक है।

About the writer

VIJAY KUMAR

VIJAY KUMAR विजय कुमार जन्म : 11 नवम्बर, 1948, मुम्बई तीन कविता संग्रह 'अदृश्य हो जायेंगी सूखी पत्तियाँ। '(1981), 'चाहे जिस शक्ल से' (1995) तथा 'रात पाली' (2006) प्रकाशित। आलोचना की दो पुस्तकें 'साठोत्तरी हिन्दी कविता की परिवर्तित दिशाएँ', '(1986) और 'कविता की संगत' (1996), बीसवीं सदी। 'के युद्धोत्तर यूरोपीय विचारकों पर एक पुस्तक 'अँधेरे 'समय में विचार' (2006) तथा बीसवीं सदी के विश्व-प्रसिद्ध कवियों पर पुस्तक 'खिड़की के पास कवि'। '(2012) प्रकाशित। आलोचक मलयज के कृतित्व पर साहित्य अकादेमी द्वारा एक मोनोग्राफ़ प्रकाशित। कविताएँ, लेख इत्यादि हिन्दी की सभी महत्त्वपूर्ण पत्र-पत्रिकाओं में छपे हैं। देश-विदेश के दर्जनों महत्त्वपूर्ण कवियों और विचारकों पर लेख एवं उनकी रचनाओं के अनुवाद प्रकाशित। हिन्दी पत्रिका 'पहल' के लिए पाकिस्तानी शायर अफ़ज़ाल अहमद, समकालीन अफ्रीकी साहित्य, वाल्टर बेंजामिन तथा। एडवर्ड सईद पर विशेष अंकों का संयोजन 'उद्भावना'। पत्रिका के बहुचर्चित कविता विशेषांक ‘सदी के अन्त में। कविता' (1998) के अतिथि सम्पादक। कविताओं व लेखों का अंग्रेजी, मराठी, बांग्ला, कन्नड़, मलयालम, पंजाबी, गुजराती, उर्दु आदि भाषाओं में अनुवाद । कविता के लिए 'शमशेर सम्मान' (1996), आलोचना के लिए 'देवीशंकर अवस्थी सम्मान' (1997), प्रियदर्शिनी अकादेमी सम्मान (2008), महाराष्ट्र हिन्दी। अकादेमी का अनंत गोपाल शेवड़े सम्मान (2012)। स्थायी पता : ए 302, महावीर रचना, सेक्टर 15. सीबीडी बेलापुर, नवी मुम्बई-100614 मोबाइल: 09820370825 ई-मेल : vijay1948ster@gmail.com |

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