शब्द और मनुष्य

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-718-8

लेखक:परमानन्द श्रीवास्तव

Pages:204

मूल्य:रु395/-

Stock:In Stock

Rs.395/-

Details

वाणी प्रकाशन से प्रकाशित वरिष्ठ साहित्यकार व सुप्रसिद्ध आलोचक परमानन्द श्रीवास्तव के 1980-1987 के बीच लिखे गये निबन्धों का संकलित आलोचनात्मक संग्रह 'शब्द और मनुष्य' पाठकों के समक्ष प्रस्तुत है। 'शब्द और मनुष्य' में समकालीन कविता और काव्यमूल्यों की पड़ताल के बहाने एक लम्बे काव्यात्मक संघर्ष को समझने और स्पष्ट करने की कोशिश की गयी है। इस संघर्ष की विशिष्टता यह है कि इसमें एक साथ कई पीढ़ियों के काव्यप्रयत्न अपना वांछित अर्थ और रूप पाते हैं। वाणी प्रकाशन से प्रकाशित इस आलोचनात्मक पुस्तक में पाठक अनुभव करेंगे कि यहाँ लेखक की दृष्टि में समकालीन कविता को अर्थ विशिष्ट बनाने वाला सर्वप्रमुख तत्त्व है जीवनराग, गहरे अर्थों में जीवनासक्ति या जीवनधर्मिता।

Additional Information

'शब्द और मनुष्य' में आलोचक परमानन्द श्रीवास्तव ने समकालीन कविता और काव्यमूल्यों की पड़ताल के बहाने वस्तुतः हिन्दी कविता की पिछली अर्धशती के भीतर अभिव्यक्त मानवीय यथार्थ की विविधताओं और जटिलताओं के परिप्रेक्ष्य में कविता की मूल्यवत्ता या सार्थकता को स्पष्ट करने की कोशिश की है। आज की कविता में यदि कवियों का बल अपने अनुभव की मूल प्रकृत भूमि उपलब्ध करने पर है तो उसके मूल्यांकन के लिए भी कविता की पहचान के साथ अपने समय की वास्तविकता का सीधा प्रत्यक्ष जरूरी है। 'शब्द और मनुष्य' इस जरूरत के अनुरूप ही एक महत्त्वपूर्ण काव्य समय के साथ संवाद और इसी तर्क से हिन्दी काव्य-समीक्षा में एक नया प्रस्थान है।

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