​तिमिर में झरता समय

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-743-0

लेखक:​​ ​​सम्पादक - ​​​राजेन्द्र मिश्र

Pages:290

मूल्य:रु595/-

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Details

मुक्तिबोध की अपनी विचारदृष्टि जो भी रही हो, उनकी उपलब्धि का एक महत्त्वपूर्ण पहलू यह है कि उनकी दृष्टि से अलग या कई बार विपरीत दृष्टि रखने वाले लेखकों ने, जिनमें कई पीढ़ियों के लोग शामिल हैं, उन पर गम्भीरता से विचार किया, उनके महत्त्व के कई पक्षों पर रोशनी डाली। यह कहना अतिशयोक्ति नहीं है कि पिछली अर्द्धशती में हिन्दी में जिन सात-दस लेखकों की मूर्धन्यता बहुमान्य रही है और जिनमें दृष्टियों, विचारधाराओं और पीढ़ियों के पार लेखकों-पाठकों ने हमारे समय के सच और सचाई को, भाषा में किये गये साहस और जोखिम को, समाज और व्यक्ति के जटिल सम्बन्धों और द्वन्द्वों को पाया-समझा है और जो हमारे लोकतन्त्र का एक तरह सर्जनात्मक और आलोचनात्मक सत्यापन और प्रश्नांकन एक साथ हैं, उनमें मुक्तिबोध की जगह बहुत उजली और निष्कलंक है। वरिष्ठ आलोचक राजेन्द्र मिश्र ने मुक्तिबोध पर इस बीच जो आलोचना लिखी गयी है उसका एक संचयन तैयार किया है। उसके समग्र होने का कोई दावा नहीं है। पर वह एक बड़े लेखक के अनेक पक्षों पर अनेक दृष्टियों से किये गये विचारों और विश्लेषणों का एक उत्तेजक समुच्चय है।

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About the writer

ED. RAJENDRA MISHRA

ED. RAJENDRA MISHRA जन्म: 17 सितम्बर 1937, अरजुन्दा, छत्तीसगढ़। शिक्षा: एम.ए. (हिन्दी साहित्य), पीएच.डी.। जीविका: पैंतीस वर्षों तक अध्यापन। मध्यप्रदेश शासन द्वारा पंडित रविशंकर विश्वविद्यालय में स्थापित बख्शी शोधपीठ के अध्यक्ष। इसी विश्वविद्यालय में हिन्दी अध्ययनशाला की शुरुआत। प्रकाशन: आधुनिक कविता, नयी कविता - सार्थकता और समझ, नयी कविता की पहचान, हद-बेहद के बीच, गाँधी अंग्रेजी भूल गया है, एक लालटेन के सहारे आदि। सम्पादन: श्रीकान्त वर्मा का रचना-संसार, श्रीकान्त वर्मा चयनिका, श्यामा-स्वप्न, शुरुआत आदि। आलोचक, सम्पादक एवं स्तम्भ लेखक। सम्पर्क: एच.आई.जी., सी-16, शैलेन्द्र नगर, रायपुर-492001 (छत्तीसगढ़) मोबाइल: 9009109897

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