आख़िरी बूँद की ख़ुशबू

Original Book/Language: उर्दू भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित।

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5000-190-5

लेखक:ज़ाहिदा हिना

अनुवाद:अनुवादक - डॉ. तसनीम सुहेल

Pages:176

मूल्य:रु250/-

Stock:Out of Stock

Rs.250/-

Details

उर्दू भाषा से हिन्दी भाषा में अनूदित।

Additional Information

अनुवादक - डॉ. तसनीम सुहेल

About the writer

ZAHIDA HINA

ZAHIDA HINA ज़ाहिदा हिना बिहार के शहर सहसराम में पैदा हुईं और कराँची में रहती हैं। सोलह वर्ष की उम्र से वे अदब और शहाफ़त से जुड़ी हुई हैं। आज वे उर्दू की सफ़े-अव्वल की लिखने वाली समझी जाती हैं। उनकी सात किताबें छप चुकी हैं, जिनमें से पाँच हिन्दुस्तान में भी छप चुकी हैं। इनकी कहानियों के अनुवाद अंग्रेजी, जर्मन, रूसी, हिन्दी, बांग्ला, सिंधी, गुरुमुखी, मराठी और पश्तो में भी हुए हैं। उनकी एक कहानी का अंग्रेजी अनुवाद उर्दू के मशहूर शायर फ़ैज़ अहमद फ़ैज़ ने किया है। इनकी गिनती पाकिस्तान के सफ़े-अव्वल के कॉलमनिगारों में भी होती है। वह अठारह वर्षों से रोज़नामा 'जंग', उर्दू न्यूज 'जद्दा' और सिंधी के अख़बार 'इबरत' के लिए साप्ताहिक कॉलम लिख रही हैं। 2005 से उन्होंने 'दैनिक भास्कर' के लिए 'पाकिस्तान डायरी' लिखनी शुरू की और उनके इन्हीं कॉलमों का संग्रह आपके हाथों में है। उनका उपन्यास 'न जुनूं रहा न परी रही' देश के विभाजन और खूनी रिश्तों के बिखर जाने की उदास कर देने वाली तस्वीर है। वाणी प्रकाशन ने इस उपन्यास को वर्ष 2004 में छापा था। इन्हें अनेक पुरस्कार और सम्मान दिये जा चुके हैं। 2001 में राष्ट्रपति के.आर. नारायणन के हाथों उन्हें सार्क लिटररी अवार्ड 2001 मिला।

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