दृश्य अदृश्य

Format:Hard Bound

ISBN:81-7055-268-0

लेखक:

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मूल्य:रु190/-

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Rs.190/-

Details

रंगमंच-जैसी बहुआयामी और बहुरंगी कला में सृजनात्मक कार्य के कितने ही पक्ष और स्तर है, जिनसे टकराये बिना रंग-सृष्टि की पूरी जटिलता को नहीं समझा जा सकता। लेखक ने स्वयं एक दर्शक की हैसियत से रंग-कला के ऐसे सभी रूपों को अवलोकन किया है और समय-समय पर उन पर अपनी लेखनी चलाई है। प्रस्तुत पुस्तक लेखक द्वारा पिछले 15-20 वर्षों के अन्तर्गत लिखे गये अनेक छोटे-बड़े लेखों का संचयन है। इन लेखों में रंग-कार्य के अत्यन्त तात्कालिक और अपेक्षाकृत अधिक देर तक प्रासंगिक बने रहने वाले, दोनों ही तरह के सवालों और चुनौतियों की चर्चा है। इनमें कुछ मुद्दे तो ऐसे हैं, जिन पर एक चार बार लिखे जाने के पश्चात् उन्हें पुनः दोहराना सार्थक जान पड़ा है। कुछ मुद्दों को एक को अधिक स्तरों पर कुरेदने की कोशिश की गयी है।

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About the writer

NEMICHANDRA JAIN

NEMICHANDRA JAIN नेमिचन्द्र जैन, जन्म: 16 अगस्त, 1919 (आगरा)। शिक्षा: एम.ए. (अंग्रेजी)। कवि, समालोचक, नाट्य-समीक्षक, पत्रकार, अनुवादक, शिक्षक। 1959-76 राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय में वरिष्ठ प्राध्यापक, 1976-82 जवाहरलाल नेरूह विश्वविद्यालय के कला अनुशीलन केन्द्र के फैलो एवं प्रभारी। अंग्रेजी दैनिक ‘स्टेट्समैन’ के नाट्य-समीक्षक, ‘दिनमान’ तथा ‘नवभारत टाइम्स’ के स्तम्भकार एवं रंगमंच की विख्यात पत्रिका ‘नटरंग’ से संस्थापक संपादक। कविताएं: ‘तार सप्तक’, (1944), ‘एकान्त’ (1973) अनुवाद: नाटक, उपन्यास, कविता, समालोचना, इतिहास, समाजशास्त्र, दर्शन, राजनीति सम्बन्धी अनेक ग्रन्थ। नाट्य विशेपज्ञ के रूप में रूप, अमरीका, इंगलैंड, पश्चिम एवं पूर्वी जर्मनी, फ्रांस, यूगोस्लाविया, चेकोस्लोवाकिया, पौलेंड आदि देशों की यात्रा।

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