ज़िक्रे फ़िराक़ : कोयला भई न राख

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-997-7

लेखक:रमेश चन्द्र द्विवेदी

Pages:252

मूल्य:रु550/-

Stock:In Stock

Rs.550/-

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ज़िक्रे फ़िराक़ : कोयला भई न राख

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RAMESH CHANDRA DWIVEDI

RAMESH CHANDRA DWIVEDI रमेश चन्द्र द्विवेदी उर्फ़ शौक़—मिर्ज़ापुरी का जन्म 6 अगस्त, 1935 को ग्राम तरकापुर- मिर्ज़ापुरी में हुआ। पिता का नाम पं. शिवदेव द्विवेदी था। फ़िराक़ के कृतित्व व साहित्य की अन्य विधाओं पर हिन्दी में लगभग तीस, अंग्रेज़ी में लगभग चालीस व उर्दू में लगभग पैंतीस लेख प्रकाशित। कवि सम्मेलन व मुशायरों में शिरकत। दर्शन, अध्यात्म और विज्ञान में विशेष रुचि। प्रकाशित कृतियाँ ‘फ़िराक़ साहब’ — (संस्मरण) हिन्दी व उर्दू में। जिश्क्र-ए- फ़िराक़ : 1. मैंने फ़िराक़ को देखा था 2. मेरे नग़्मों को नींद आती है उर्दू की इश्क़िया शायरी, आदमी (नाटक, फ़िराक़ साहब द्वारा जर्मन भाषा से अनूदित), ‘शबनमिस्ताँ’, ‘रम्ज़-ओ-कियानात’, ‘रूह-ए-कायनात’, ‘नौरत्न’ (फ़िराक़ की कहानियाँ), ‘धरती की करवट’, ‘नज़ीर की बानी’, ‘जंज़ीरें टूटती हैं’ और ‘राग-विराग’ आदि पुस्तकों की प्रस्तुति। सम्मान प्रयाग की साहित्य और सांस्कृतिक संस्था अरुणिमा द्वारा ‘साहित्य मणि’ सम्मान, इंटरनेशनल लायन्स क्लब, इलाहाबाद द्वारा साहित्य सौरभ सम्मान।

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