उत्तर आधुनिक : साहित्य विमर्श

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-7055-485-1

लेखक:सुधीश पचौरी

Pages:212

मूल्य:रु375/-

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Rs.375/-

Details

उत्तर आधुनिक : साहित्य विमर्श

Additional Information

- 'उत्तर आधुनिकता' के डर क्या हैं, क्यों हैं ? -अब तक की साहित्यिक-सिद्धान्तिकी (लिटरेरी थ्योरी) के भीतर उसने कहाँ-कहाँ संकट पैदा किये -फूको और देरिदा ने आलोचना को किस तरह 'विमर्श' में बदला है ? -स्त्रीत्ववादी विमर्श ने साहित्य के मर्दवादी विमर्श को किस तरह अपदस्थ करना शुरू किया है ? - 'पेश्टीच' और 'पैरोडी' किस तरह उत्तर-आधुनिक साहित्य-रूप हैं ? -समकालीन हिन्दी साहित्य में उत्तर-आधुनिक 'क्षण', कब-कहाँ पैदा हो रहे हैं और उन्हें किस तरह पढ़ा जाये ? इन तथा अन्य अनेक सवालों के जवाब में, नई मार्क्सवादी-सिद्धान्तिकी का अपना पाठ बनाते हुए सुधीश पचौरी एक बार फिर समकालीन साहित्य में चुनौतीपूर्ण उत्तर-आधुनिक साहित्यिक विमर्श पैदा करते हैं।

About the writer

SUDHISH PACHAURI

SUDHISH PACHAURI जन्मः 29 दिसम्बर, जनपद अलीगढ़। शिक्षाः एम.ए. (हिन्दी) (आगरा विश्वविद्यालय), पीएच.डी. एवं पोस्ट डॉक्टरोल शोध (हिन्दी), दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली। मार्क्सवादी समीक्षक, प्रख्यात स्तम्भकार, मीडिया विशेषज्ञ। चर्चित पुस्तकेंः नई कविता का वैचारिक आधार; कविता का अन्त; दूरदर्शन की भूमिका; दूरदर्शनः स्वायत्तता और स्वतन्त्राता (सं.); उत्तर-आधुनिक परिदृश्य; उत्तर-आधुनिकता और उत्तर संरचनावाद; नवसाम्राज्यवाद और संस्कृति; नामवर के विमर्श (सं.); उत्तर-आधुनिक साहित्य विमर्श; दूरदर्शनः विकास से बाजशर तक; उत्तर-आधुनिक साहित्यिक-विमर्श; देरिदा का विखण्डन और विखण्डन में ‘कामायनी’; मीडिया और साहित्य; टीवी टाइम्स; साहित्य का उत्तरकाण्ड; अशोक वाजपेयी पाठ कुपाठ (सं.); प्रसार भारती और प्रसारण-परिदृश्य; दूरदर्शनः सम्प्रेषण और संस्कृति, स्त्राी देह के विमर्श; आलोचना से आगे; मीडिया, जनतन्त्रा और आतंकवाद; निर्मल वर्मा और उत्तर-उपनिवेशवाद; विभक्ति और विखण्डन; हिन्दुत्व और उत्तर- आधुनिकता; मीडिया की परख; पॉपूलर कल्चर; भूमण्डलीकरण, बाजशर और हिन्दी; टेलीविजन समीक्षाः सिद्धान्त और व्यवहार; उत्तर-आधुनिक मीडिया विमर्श; विंदास बाबू की डायरी; फासीवादी संस्कृति और पॉप-संस्कृति। सम्मानः मध्यप्रदेश साहित्य परिषद् का रामचन्द्र शुक्ल सम्मान (देरिदा का विखण्डन और विखण्डन में ‘कामायनी’); भारतेन्दु हरिश्चन्द्र पुरस्कार से सम्मानित; दिल्ली हिन्दी अकादमी द्वारा ‘साहित्यकार’ का सम्मान। सम्प्रतिः डीन ऑफ कॉलेजिज, दिल्ली विश्वविद्यालय, दिल्ली।

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