कथाएँ पहाड़ों की

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5229-460-2

लेखक:रमेश पोखरियाल ‘निशंक’

Pages:247

मूल्य:रु495/-

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Rs.495/-

Details

​शिखरों के ​संघर्ष ​ ​​कवि ‘निशंक’ ने कविता, कहानी और उपन्यास के क्षेत्रा में निरन्तर लेखन कार्य किया है। दो दर्जन से अधिक कृतियों के रचनाकार ‘निशंक’ की रचनाओं की लोकप्रियता का ही प्रमाण है कि उनके व्यक्तित्व- कृतित्व पर न केवल कई शोधकर्म हुए हैं और हो रहे हैं, बल्कि देश-विदेश की अनेक भाषाओं ​ में उनकी रचनाओं का सफल अनुवाद भी हुआ है। साथ ही उन्हें अनेक पुरस्कार एवं सम्मान प्राप्त हुए हैं। पार्वत्य प्रदेश के छोटे से गाँव में जन्म लेकर, प्रकृति की सुकुमार गोद में पल-बढ़कर यहाँ के जन-जीवन की बारीकियों को आपने बहुत आत्मीय एवं सचेत भाव से देखा तथा जैसा कि एक संवेदनशील साहित्यशिल्पी कर सकता था, अपनी रचनाओं में, अत्यन्त प्रभावपूर्ण ढंग से उकेरा है। यही कारण है कि उनकी सभी रचनाएँ उत्तराखण्ड के जनजीवन, यहाँ के मनुष्य की पीड़ाओं, सुख-दुःख और संघर्षों का जीवन्त दस्तावेजश् हैं। उनमें निरन्तर क्षरित होते जा रहे जीवन-मूल्यों को बचाने की उत्कट इच्छा है। निशंक के उपन्यास पाठक को शुरू से अन्त तक अपने में बाँधे रहते हैं। इसका कारण उनके लेखन में सहजता है, संवादों या कथोपकथनों की भरमार नहीं है, और न नाटकीयता। इसलिए कहें तो यह भी कह सकते हैं कि ये उपन्यास डॉ. रमेश पोखरियाल ‘निशंक’ के स्वयं के सरल-सहज, समर्पित और मानव-मूल्यों से आपूरित व्यक्तित्व का आईना भी हैं। इसी क्रम में पाठकों की रुचि को देखते हुए उनके चार उपन्यासµछूट गया पड़ाव, बीरा, पहाड़ से ऊँचा एवं मेजर निराला को ‘शिखरों के संघर्ष’ रूप में प्रस्तुत किया गया है। पूर्ण विश्वास है कि पाठक निशंक के चारों उपन्यासों का रसास्वाद एक साथ ग्रहण कर सकेंगे।

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About the writer

DR. RAMESH POKHRIYAL

DR. RAMESH POKHRIYAL मूल नाम : डॉ. रमेश पोखरियाल निशंक जन्म : 15 अगस्त 1959, पिनानी , पौड़ी गढ़वाल तत्कालीन (उत्तराखण्ड) भाषा : हिंदी विधाएँ : कविता संग्रह, कथा संग्रह, पत्र-संकलन, उपन्यास मुख्य कृतियाँ कविता संग्रह- समर्पण; नवाकुर, मुझे विधाता बनना है, तुम भी मेरे साथ चलो; मातृभूमि के लिए; जीवन पथ में; कोई मुश्किल नहीं; प्रतीक्षा; ए वतन तेरे लिए कथा संग्रह- रोशनी की एक किरण; बस एक ही इच्छा; क्या नहीं हो सकता; भीड़ साक्षी है; खडे़ हुए प्रश्न; विपदा जीवित है; एक और कहानी; मेरे संकल्प पत्र-संकलन- मेरी व्यथा-मेरी कथा उपन्यास- निशान्त, मेजर निराला; बीरा; पहाड़ से ऊंचा संपर्क 37/1 विजय कॉलोनी, रवीन्द्र नाथ टैगोर मार्ग, देहरादून, उत्तराखण्डर ई-मेल nishankramesh@gmail.com

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