बालसाहित्य और आलोचना

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-5072-981-6

लेखक:श्याम कश्यप

Pages:364

मूल्य:रु695/-

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Rs.695/-

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बालसाहित्य और आलोचना

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प्राचीन बालसाहित्य में प्राय: राजा-रानी और दरबारी या फिर पशु-पक्षी पात्र होते हैं और दिखाया जाता है कि राजा न्यायप्रिय है। हालाँकि इतिहास साक्षी है कि राजा हमेशा न्यायप्रिय रहा हो, ज़रूरी नहीं। बाल-कहानियों में कई बार एक ब्राह्मण चरित्र होता है जो विद्वान होने के साथ-साथ अनिवार्यतः निर्धन भी होता है। इन कहानियों में ऐसी पंक्तियाँ आम मिल जाती हैं कि- “किसी गाँव में एक निर्धन ब्राह्मण रहता था या किसी गाँव में एक धनवान बनिया रहता था।" प्राय: कहानियों में ब्राह्मण निर्धन किन्तु विद्वान और बनिया धूर्त एवं अमीर होता है। यहाँ बनिये का अमीर होना इस बात का द्योतक है कि समाज में आज की तरह ही व्यापार विद्वता पर हावी रहा होगा। साथ ही, राजा मूर्ख और जिद्दी होता था। इसे हम इस तरह समझ सकते हैं कि बाल साहित्यकारों में राजतंत्र के विरुद्ध एक विद्रोही स्वर स्वाभाविक रूप में मौजूद था। बाल कहानियों में एक नैतिक उपदेश होता था। और बच्चों के अवचेतन में इस तथ्य को स्थापित करने की कोशिश की जाती रही थी कि बहुत सारी मुसीबतों के बावजूद कोई धूर्त नहीं, बल्कि अंतत: एक सीधा-सच्चा इंसान ही विजयी होता है।

About the writer

Anuj Kumar, Rekha Pandey

Anuj Kumar, Rekha Pandey डॉ. अनुज कुमार जन्म : मोतिहारी, बिहार शिक्षा : एम.ए., (जेएनयू, नई दिल्ली) 'टेलीविज़न की प्रस्तुति कला' विषय पर पीएचे डी., सूचना प्रौद्योगिकी और प्रबन्धन में एडवांस डिप्लोमा। लेखन : 'कैरियर गर्लफ्रेंड और विद्रोह' (पहला 'कहानी संग्रह भारतीय ज्ञानपीठ से 'प्रकाशित), 'वागर्थ','नया ज्ञानोदय', "हंस', 'परिकथा' 'पाखी', 'नयापथ', "लमही' 'जनसत्ता' आदि हिन्दी की विभिन्न पत्र-पत्रिकाओं में कहानियाँ, कविताएँ 'आलोचनात्मक लेख एवं पुस्तक समीक्षाएँ। सम्प्रति : सम्पादक - 'कथा' पत्रिका सम्पर्क : मो. 09868009750 ई मेल- anuj.writer@gmail.com / डॉ. रेखा कुमारी पाण्डेय जन्म : ग्राम लोहटी, गोपालगंज, बिहार शिक्षा : प्रारम्भिक शिक्षा ग्राम तथा आस-पास के स्कूलों से, एम.ए., एम.फिल एवं पीएच.डी. सेन्ट्रल यूनिवर्सिटी, हैदराबाद लेखन : 'छायावादी कवियों का आलोचना कर्म' 'कथा', 'वागर्थ', 'सापेक्ष', 'जनमत', 'जनविकल्प', 'पाखी' तथा कई अन्य पत्र-पत्रिकाओं में लेख एवं समीक्षा। 'साहित्य का नया सौन्दर्य शास्त्र' तथा 'लेखिकाओं की दृष्टि में महादेवी वर्मा' पुस्तकों में शोध आलेख 'सम्मान : वागर्थ पत्रिका, कोलकाता एवं राजकमल प्रकाशन, दिल्ली की ओर से 2008 का नवलेखन आलोचना पुरस्कार। सम्प्रति : असिस्टेण्ट प्रोफेसर, राष्ट्रीय संस्कृत संस्थान, नई दिल्ली ईमेल : pan011@gmail.com

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