​तीसरा रुख ​

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-7055-459-2

लेखक:

Pages:176

मूल्य:रु150/-

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Rs.150/-

Details

समकालीन महत्त्वपूर्ण साहित्यिक-सांस्कृतिक सन्दर्भों के पैने विश्लेषण से युक्त यह पुस्तक नयी दृष्टि के उन्मेष की एक सार्थक परिणति है। पुस्तक में सत्तातन्त्र और मानवाधिकार के परस्पर जटिल सम्बन्धों का खुलासा हुआ है और हमारी सामाजिक संरचना में मौजूद संस्कृति की वर्चस्व शाली धारा के मूल चरित्र का उद्घाटन भी। सर्वथा नकार या अन्धस्वीकार जैसे ध्रुवान्त निष्कर्षों से बचते हुए डॉ. पुरुषोत्तम अग्रवाल ने विश्लेषण-मूल्यांकन में सन्तुलन बनाए रखा है। यह सन्तुलन लीपा-पोती कदापि नहीं है वरन इसमें तीखेपन और मिठास बगैर घालमेल के एक साथ उपस्थित हैं। ऐसा सन्तुलन प्रखर मेधा और गहरी संवेदनशीलता के कारण ही सम्भव हो पाया है। साहित्य और संस्कृति की प्रचलित आलोचना-दृष्टियों को प्रश्नबिद्ध करती यह पुस्तक 'तीसरा रुख़' तराशने की एक ईमानदार कोशिश है जो पाठकों को एक साथ वैचारिक ऊर्जा, बौद्धिक ऊष्मा और गहरी संवेदनशीलता प्रदान करेगी।

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Purushottam Agrawal

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