उर्दू का खुलता दरीचा

Format:Hard Bound

ISBN:978-81-8143-355-8

लेखक:

Pages:582

मूल्य:रु595/-

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Rs.595/-

Details

उर्दू पर खुलता दरीचा

Additional Information

अलोचना साहित्य की और भाषा विज्ञान भाषा की आँख होती है। लेकिन आलोचना और भाषा विज्ञान में समान गति रखने वाले विद्वान दुर्लभ होते हैं। उर्दू के मूर्धन्य आलोचक और भाषा वैज्ञानिक प्रो. गोपीचन्द नारंग में यह अनूठा संगम है। उनके चुनींदा लेखों की यह किताब ‘उर्दू पर खुलता दरीचा’ हिन्दी पाठकों को उर्दू भाषा और साहित्य के प्रति गंभीर दृष्टिकोण विकसित करने में बहुत दूर तक सहायक होगी। क्योंकि वे पाठ की तह में उतरने वाली दृष्टि रखतें हैं एवं पाठकों को आहिस्ता-आहिस्ता अपने पुष्ट तर्कों के सहारे निष्कर्ष तक की यात्रा कराते हैं। उनके लेखों में एक दुर्लभ पठन-सुख भी है।

About the writer

GOPI CHAND NARANG

GOPI CHAND NARANG प्रो. गोपीचन्द नारंग उर्दू के अन्यतम साहित्यिक, समालोचक तथा बुद्धिजीवी हैं। आलोचना, शोध, भाषा-विज्ञान तीनों में निष्णात प्रो. नारंग पैंतालीस से भी ज्यादा पुस्तकों के लेखक एवं संपादक हैं। मौलिक एवं अंतर्दृष्टिपूर्ण लेखन के लिए भारत के राष्ट्रपति द्वारा आपको पद्मश्री से सम्मानित किया जा चुका है। पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने भी ‘तमग़-ए-इम्तियाज़’ प्रदान कर आपकी बौद्धिक एवं साहित्य-सेवाओं को स्वीकार किया। आपको लखनऊ का ‘उर्दू-हिन्दी साहित्य कमेटी पुरस्कार’ (1984) और ‘ग़ालिब पुरस्कार’ (1985) भी प्राप्त हैं। इनके अलावा ‘अमीर खुसरों सम्मान’ (शिकागो, 1986) ‘कनाडा उर्दू पुरस्कार’ (टोरंटो, 1987) और उत्तरप्रदेश उर्दू अकादमी के ‘अखिल भारतीय मौलाना अबुल कलाम आजाद पुरस्कार’ से भी सम्मानित किया गया। आपकी उर्दू किताब साख्तियात पस साख़्तियात और मशरिकी शेरियात को साहित्य अकादेमी पुरस्कार (1985) प्रदान किया गया।

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