लता सुर-गाथा

Format:Paper Back

ISBN:978-93-5072-842-0

लेखक:यतीन्द्र मिश्र

Pages:640

मूल्य:रु695/-

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Rs.695/-

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लता सुर-गाथा

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नकी आवाज़ से चेहरे बनते हैं। ढेरों चेहरे,जो अपनी पहचान को किसी रंग-रूप या नैन –नक्शे से नहीं, बल्कि सुर और रागिनी के आइनें में देखने से आकार पते हैं। एक ऐसी सलोनी निर्मिती, जिसमे सुर का चेहरा दरअसल भावनाओं का चेहरा बन जाता है। कुछ-कुछ उस तरह,जैसे बचपन में पारियों की कहानियों में मिलने वाली एक रानी परी का उदारता और प्रेम से भीगा हुआ व्यक्तित्व हमको सपनों में भी खुशियों और खिलोंनों से भर देता था। बचपन में रेडियों या ग्रामोफोन पर सुनते हुए किसी प्रणय-गीत या नृत्य की झंकार में हमें कभी यह महसूस ही नही हुआ कि इस बक्से के भीतर कुछ निराले द्गंग से मधुबाला या वहीदा रहमान पियानो और सितार कि धुन पर थिरक रही हैं, बल्कि वह एक सीधी-सादी महिला कि आवाज़ कम झीना सा पर्दा है, जिस पर फूलों का भी हरसिंगार कि पंखुरियों का रंग और धरती पर चंद्रमा कि टूटकर गिरी हुई किरणों का झिलमिल पसरा है।

About the writer

ED. YATINDRA MISHRA

ED. YATINDRA MISHRA यतीन्द्र मिश्र हिन्दी कवि, सम्पादक और संगीत अध्येता हैं। उनके अब तक तीन कविता-संग्रह, शास्त्रीय गायिका गिरिजा देवी, नृत्यांगना सोनल मानसिंह एवं शहनाई उस्ताद बिस्मिल्ला ख़ाँ पर हिन्दी में प्रामाणिक पुस्तकें प्रकाशित हैं। प्रदर्शनकारी कलाओं पर निबन्धों की एक किताब ‘विस्मय का बखान’ तथा कन्नड़ शैव कवयित्री अक्क महादेवी के वचनों का हिन्दी में पुनर्लेखन ‘भैरवी’ नाम से प्रकाशित हुआ है। वरिष्ठ कवि कुँवरनारायण पर एकाग्र तीन पुस्तकों क्रमशः कुँवरनारायण - ‘संसार’ एवं ‘उपस्थिति’, ‘कई समयों में’ एवं ‘दिशाओं का खुला आकाश’, अशोक वाजपेयी के गद्य का एक संचयन ‘किस भूगोल में किस सपने में’ तथा अज्ञेय काव्य से एक चयन ‘जितना तुम्हारा सच है’ प्रकाशित हैं। साथ ही, फ़िल्म निर्देशक एवं गीतकार गुलज़ार की कविताओं एवं गीतों के चयन क्रमशः ‘यार जुलाहे’ तथा ‘मीलों से दिन’ नाम से सम्पादित हैं। ‘गिरिजा’ का अंग्रेजी, ‘यार जुलाहे’ का उर्दू तथा अयोध्या शृंखला कविताओं का जर्मन अनुवाद प्रकाशित हुआ है। उन्हें रज़ा पुरस्कार, भारत भूषण अग्रवाल स्मृति पुरस्कार, भारतीय भाषा परिषद युवा पुरस्कार, हेमन्त स्मृति कविता सम्मान सहित भारत सरकार के संस्कृति मंत्रालय की कनिष्ठ शोधवृत्ति एवं सराय, नयी दिल्ली की स्वतंत्र शोधवृत्ति मिली हैं। साहित्यिक-सांस्कृतिक गतिविधियों हेतु भारत के प्रमुख नगरों समेत अमेरिका, इंग्लैण्ड, मॉरीशस एवं अबु धाबी की यात्राएँ की हैं। अयोध्या में रहते हैं तथा समन्वय व सौहार्द के लिए विमला देवी फाउण्डेशन न्यास के माध्यम से सांस्कृतिक गतिविधियाँ संचालित करते हैं।

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