साहित्य में नारी चेतना

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-86799-16-6

लेखक:करन बजाज

Pages:176

मूल्य:रु450/-

Stock:Out of Stock

Rs.450/-

Details

नारी-चेतना के एक स्वस्थ स्वरूप और प्राचीन भारतीय समाज में नारी की एक गरिमामय स्थिति के साक्ष्य हमारे साहित्य में मौजूद हैं। स्त्री के सन्दर्भ में समाज की अधोगति के तेज़ प्रवाह से मुकाबले के ही नहीं, उसमें बह पड़ने के प्रसंग भी हमारे साहित्येतिहास में कम नहीं हैं। नारी-चेतना और उसके सामाजिक-साहित्यिक-सांस्कृतिक प्रभावों, प्रतिक्रियाओं के आकलन की, भारतीय सन्दर्भ में एक सतत आवश्यकता बन गयी है। इसलिए भी कि एक अति से मुक्ति के उत्साह में दूसरी अति तक पहुँच जाने के जो ख़तरे होते हैं, उनकी पहचान निरन्तर होती रहे। इसलिए भी कि उस अद्यतन विकास का भी आकलन-परीक्षण हो सके, जिसकी परिणतियाँ दिल्ली के निर्भया काण्ड या मुम्बई के शक्ति मिल कम्पाउण्ड जैसी दरिन्दगियों के रूप में प्रगत समाज की हैवानियत का नमूना बनकर कानून और व्यवस्था के ही नहीं, मनुष्यता के सामने भी गम्भीर प्रश्न बनकर खड़ी हो गयी हैं। इसलिए भी कि भोग को चरम साध्य के रूप में स्वीकार करने वाले बाज़ारवाद और वैश्वीकरण के दौर में स्त्री-विमर्श की पश्चिमी अवधारणाओं से भारतीय समाज में सम्बन्धों की सूत्रधार के रूप में, चेतना के स्पन्दन के स्रोत के रूप में स्थापित स्त्री की सत्ता को जो चुनौतियाँ मिल रही हैं, उनका सामना किया जा सके। इसलिए भी कि स्त्री-स्वातन्त्र्य का मतलब स्त्री को अकेला कर देने की साजिशों में न बदल पाये।

Additional Information

No Additional Information Available

About the writer

Edited by Dayanidhi Mishra, Udayan Mishra, Prakash Uday

Edited by Dayanidhi Mishra, Udayan Mishra, Prakash Uday दयानिधि मिश्र जन्म : 01 अक्टूबर, 1948, गोरखपुर। गोरखपुर विश्वविद्यालय सहित विभिन्न महाविद्यालयों में 8 वर्षों का अध्यापन-अनुभव। पुलिस उप-महानिरीक्षक पद से अवकाश प्राप्त। सचिव, विद्याश्री न्यास। उपाध्यक्ष, भारत धर्म महामण्डल। न्यासी, वेणी माधव ट्रस्ट। आचार्य विद्यानिवास मिश्र की स्मृति में स्थापित विद्याश्री न्यास के तत्वावधान में राष्ट्रीय-अन्तरराष्ट्रीय संगोष्ठियों, व्याख्यानों, सम्मान समारोहों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का नियमित आयोजन। सम्मान : सराहनीय सेवा के लिए राष्ट्रपति का पुलिस पदक (1994), हिन्दुस्तान समाचार का भाषा सम्मान (2014), सेवक स्मृति साहित्य श्री सम्मान (2016), वासुदेव द्विवेदी सम्मान (2017)। सम्प्रति : विद्यानिवास मिश्र रचनावली (21 खण्डों में) का सम्पादन। वाराणसी में निवास। मो. : 09415776312 / उदयन मिश्र जन्म : 15 दिसम्बर, 1971, गोरखपुर। हरिश्चन्द्र पी.जी. कॉलेज वाराणसी में 24.07.1990 से 19.01.2009 तक मनोविज्ञान का अध्यापन। सम्प्रति : प्राचार्य, श्री बलदेव पी.जी. कॉलेज, बड़ागाँव, वाराणसी। प्रबन्ध सम्पादक, 'चिकितुषी', त्रैमासिक शोध-पत्रिका। शोध-पत्रिका 'इण्डियन जर्नल ऑफ सोशल साइंस एण्ड सोसाइटी' एवं 'इण्टरनेशनल जर्नल ऑफ सोशल साइंस एण्ड सोसाइटी' के सम्पादन से सम्बद्ध। इतिहास, परम्परा और आधुनिकता तथा लोक और शास्त्र : अन्वय और समन्वय, मौन की अभिव्यंजना का सहसम्पादन। अन्तरराष्ट्रीय युवा प्रभारी, विश्व भोजपुरी सम्मेलन। आजीवन सदस्य, भारतीय विज्ञान कांग्रेस। पचास से अधिक राष्ट्रीय संगोष्ठियों, कार्यशालाओं का संयोजन। ओम हिन्दू मीडिया, हॉलैंड द्वारा आयोजित सिम्पोजियम में 'कॉन्सेप्ट ऑफ मेण्टल हेल्थ इन भगवद्गीता' पर व्याख्यान। 'इनसाइक्लोपीडिया ऑफ बेसिक एजुकेशन' (3 खण्डों में) के अलावा एक दर्जन से अधिक पुस्तकों का लेखन-सम्पादन। मॉरिशस सरकार एवं इन्दिरा गाँधी सांस्कृतिक केन्द्र द्वारा 'कर्मयोगी' सम्मान, 2009 एवं संकल्प संस्थान द्वारा 'शिक्षारत्न' से सम्मानित। सम्पर्क : 68, अभिलाषा कॉलोनी, यू.पी. मोटर्स के पीछे, नदेसर, वाराणसी। मो. : 09415225452 / प्रकाश उदय जन्म : 20 अगस्त, 1964, भोजपुर। हिन्दी विभाग, श्री बलदेव पी.जी. कॉलेज, बड़ागाँव, वाराणसी में अध्यापन। हिन्दी-भोजपुरी कविता-कहानी-समीक्षा के क्षेत्र में सक्रिय। वाचिक कविता : भोजपुरी; हिन्दी की जनपदीय कविता; विद्यानिवास मिश्र संचयिता; इतिहास परम्परा और आधुनिकता तथा लोक और शास्त्र : अन्वय और समन्वय मौन की अभिव्यंजना : अज्ञेय का सहसम्पादन। भोजपुरी पत्रिका 'समकालीन भोजपुरी साहित्य' और हिन्दी पत्रिका 'प्रसंग' के सम्पादन से सम्पर्क : शिव 5/41, आर-2, लक्ष्मणपुर, शिवपुर, वाराणसी। मो. : 09415290286

Books by Edited by Dayanidhi Mishra, Udayan Mishra, Prakash Uday

Customer Reviews

No review available. Add your review. You can be the first.

Write Your Own Review

How do you rate this product? *

           
Price
Value
Quality