दस कालजयी उपन्यास ज़मीन की तलाश

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-8788-934-7

लेखक:

Pages:122

मूल्य:रु395/-

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Rs.395/-

Details

एक उपन्यासकार या साहित्यकार की यात्रा इतनी सीमित नहीं होती। वह सत्य की तलाश की अमिट, अनबुझ प्यास के साथ जीता है, परिस्थितियों का घना जंगल छानकर ढूँढ़ निकालने की कोशिश करता रहता है। सौन्दर्य पर मुग्ध होता है, प्रभावित होता है और शिवम् का उद्देश्य अन्तर्मन में पाले रहता है। जीवन का ज़हर पीकर उसे अमृत की रचना करनी होती है। वह कृति, जो रचना और रचना को लेकर प्रायोजित चर्चाओं के बावजूद लोगों के दिलों में देर तक जगह नहीं बना लेती, काल कवलित हो जाती है, मर जाती है जैसे अख़बार में छपी ख़बर। वह कृति, जो काल की हदों को पार कर लोगों को अभिभूत करती रहती है, प्रभावित करती है, कोई उसे पढ़ता है, फिर पढ़ता है और दूसरों को पढ़ने के लिए कहता है, ख़रीदकर अपने मित्र-स्नेही को उपहारस्वरूप देता है क्योंकि वह उसे लाखों परेशानियों, तनाव से भरी जिश्न्दगी में डूबते हुए को कहीं तिनके का सहारा देती है, कालजयी हो जाती है। वह कृति ‘ट्रांसेड’ करती है, वैतरणी पार कर जाती है, स्मृतियों में बसी रहती है। सुनते रहे हैं महाकाव्य कालजयी हो सकता है परन्तु आज उपन्यास जिसे महाकाव्यात्मक उपन्यास (एपिक) कहा जाने लगा है, आसानी से कालजयी हो सकता है, हुआ है। बशर्ते कि काल के अतिक्रमण का सामर्थ्य उस उपन्यास में हो।

Additional Information

प्रस्तुत पुस्तक में दस कालजयी उपन्यास हैं- ‘गोदान’ (प्रेमचन्द), ‘बूँद और समुद्र’ (अमृत लाल नागर), ‘शेखर: एक जीवनी’ (अज्ञेय), ‘बाणभट्ट की आत्मकथा’ (आचार्य हजारी प्रसाद द्विवेदी), ‘झूठा सच’ (यशपाल), ‘मैला आँचल’ (फणीश्वरनाथ रेणु), ‘तमस’ (भीष्म साहनी), ‘आधा गाँव’ (राही मासूम रज़ा), ‘राग दरबारी’ (श्रीलाल शुक्ल), ‘धरती धन न अपना’ (जगदीश चन्द्र)। ये दस उपन्यास साहित्य का इतिहास रच रहे हैं। पूरा भारत इन उपन्यासों के माध्यम से देखा जा सकता है। आचार्य शुक्ल ने उपन्यास को लेकर जो कुछ कहा, वह अकारथ नहीं था- ”मानव जीवन के अनेक रूपों का परिचय कराना उपन्यास का काम है। यह उन सूक्ष्म घटनाओं को प्रत्यक्ष करने का कार्य करता है, यत्न करता है, जिनसे मनुष्य का जीवन बनता है, जो इतिहास आदि की पहुँच से बाहर है। बहुत लोग उपन्यास का आधार शुद्ध कल्पना बताते हैं पर उत्कृष्ट उपन्यासों का आधार अनुमान शक्ति है, न कि कल्पना।“ ..

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Tarsem Gujral

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