गाँधी की अहिंसा दृष्टि

Format:Hard Bound

ISBN:978-93-8956-355-9

लेखक:

Pages:504

मूल्य:रु895/-

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गाँधी की अहिंसा दृष्टि

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अहिंसा का सामान्य अर्थ है-'हिंसा न करना' । लेकिन व्यापक अर्थों में किसी भी प्राणी को मन, वचन, कर्म और वाणी से नुकसान न पहुँचाना ही अहिंसा है। मनुष्य को एकमात्र वस्तु जो पशु से भिन्न करती है वह है अहिंसा। व्यक्ति हिंसक है तो फिर वह पशुवत् है। मानव होने के लिए पहली शर्त है अहिंसा का भाव होना। महात्मा बुद्ध, महावीर, महात्मा गाँधी जैसे चिन्तकों ने अहिंसा को परम धर्म माना है। भारतीय दर्शन में कहा गया है कि अहिंसा की साधना से बैर भाव का लोप हो जाता है। बैर भाव के निकल जाने से काम, क्रोध आदि वृत्तियों का निरोध होता है। मन में शान्ति और आनन्द का भाव आता है इसलिए सभी को मित्रवत समझने की दृष्टि बढ़ जाती है, सही और ग़लत में भेद करने की क्षमता बढ़ जाती है। यह सब कुछ मन में शान्ति लाता है। विश्व में अहिंसा को जीवन और समाज के सभी क्षेत्रों में स्थापित करना एक महत्त्वपूर्ण चुनौती बन गयी है, इस चुनौती को गाँधी ने स्वीकार किया और उन्होंने अहिंसक साधनों से सत्य की सिद्धि करने का प्रयास किया। व्यक्तिगत, पारिवारिक, सामाजिक, राष्ट्रीय और अन्तरराष्ट्रीय क्षितिज पर विकराल होती समस्याओं का समाधान अहिंसा में निहित है जो आत्म कष्ट सहन करने तथा प्रेम को व्यापक करने से ही सम्भव हो सकता है। सत्याग्रह की सैद्धान्तिक व्याख्या में इतिहास के तथ्य तो आते ही हैं, परम्परा और धार्मिक सन्दर्भ से भी हम दृष्टि पाते हैं। गाँधी की अनुपम देन यही थी कि उन्होंने व्यक्तिगत आचार नियमों को सामाजिक और सामूहिक प्रयोग का विषय बनाया। उन्होंने स्वयं कहा है कि वे कोई नये सिद्धान्त का आविष्कार नहीं कर रहे हैं, उन्होंने जो कुछ भी दिया वह विभिन्न स्रोतों में उपलब्ध है और विभिन्न व्यक्तियों ने उसका प्रयोग भी किया है। गाँधी का अहिंसा सम्बन्धी सिद्धान्त प्रयोग धर्म पर आधारित है। जहाँ एक ओर वे जीवहत्या के सम्बन्ध में व्यावहारिक व्यक्ति की तरह आलोचनाओं का प्रतिउत्तर देते हुए अडिग दिखते हैं वहीं अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर वीरता और शौर्य का उदाहरण प्रस्तुत करने के लिए चेकोस्लोवाकिया को अहिंसक प्रतिकार के लिए उत्प्रेरित भी करते हैं। व्यवहारकर्ता के रूप में व्यक्तिगत जीवन में शुद्धता का आग्रह रखते हुए जहाँ एक ओर वे एकादश व्रत का अनुष्ठान करते हैं वहीं दूसरी ओर अन्याय के प्रतिकार के लिए सत्याग्रह जैसे अनुपम अस्त्र भी प्रदान करते हैं। ‘गाँधी की अहिंसा दृष्टि' पुस्तक में गाँधी के अहिंसा से सम्बन्धित विचारों को मूल रूप में रखा गया है। आज परिवार से लेकर विश्व तक हिंसा की प्रवृत्ति बढ़ी है। वैचारिक असहिष्णुता ने लोकतान्त्रिक मूल्यों को तिरोहित कर दिया है। वर्तमान सभ्यता के समक्ष जो त्रासदी है, सारी मुश्किल विकल्प गाँधी विचार में समाहित है। हम आशा करते हैं कि यह पुस्तक वैचारिक अहिंसा को पुष्ट कर अहिंसात्मक समाज रचना में विश्वास करने वाले सुधी पाठकों को तो दिशा देगी ही और हिंसा पथ में भटके लोगों में भी समझदारी विकसित कर सकेगी... - डॉ. सच्चिदानन्द जोशी सदस्य सचिव, इन्दिरा गाँधी राष्ट्रीय कला केन्द्र नयी दिल्ली

About the writer

Manoj Kumar, Amit Kumar Bishwas

Manoj Kumar, Amit Kumar Bishwas रामधारी सिंह दिनकर की प्रेरणा और प्रो. रामजी सिंह के सद्प्रयासों से देशभर में गाँधी विचार का पहला विभाग तिलका मांझी भागलपुर विश्वविद्यालय, भागलपुर में 02 अक्टूबर, 1980 में खुला तो उसी विभाग के प्रथम सत्र में सर्वोकृष्ट अंकों से उत्तीर्ण होकर रिसर्च एसोसिएट (1991), शिक्षक (1997) तथा प्रभारी प्राध्यापक के रूप में प्रो. मनोज मनोज कुमार कुमार ज़िम्मेदारियों का निर्वहन करते हुए सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय योगदान करते रहे हैं। आन्दोलन और सेवा के साथ-साथ अकादमिक क्षेत्र में इन्होंने उल्लेखनीय योगदान किया है। सम्प्रति महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा में महात्मा गाँधी फ्यूजी गुरुजी समाज कार्य अध्ययन केन्द्र के संस्थापक निदेशक हैं। इसके अतिरिक्त विधि विद्यापीठ, शिक्षा विद्यापीठ के अधिष्ठाता, कुलानुशासक आदि ज़िम्मेदारियों का भी निर्वहन कर रहे हैं। इनकी उल्लेखनीय पुस्तकें- 'लोकतन्त्र और विश्व शान्ति', 'बिहार की भूमि समस्या', 'गाँधी-दृष्टि : युवा रचनात्मकता के आयाम' (सम्पा.), ‘गाँधी चरितमानस' (सम्पा.) प्रकाशित तथा 'हिन्द स्वराज का तत्त्व दर्शन' और 'गाँधी की संस्था तथा आश्रम' आदि प्रकाशनाधीन हैं। सम्पर्क : 9422404277 ई-मेल : manojkumardean@rediffmail.com IIIIIIIIIIIIIIIIIIIIIII युवा सांस्कृतिक पत्रकार। वर्ष 2004 से इनका पत्रकारिता के क्षेत्र में सार्थक हस्तक्षेप रहा है। संचार, साहित्य और नव सामाजिक विमर्श पर निरन्तर लेखन। विविध पत्र-पत्रिकाओं में दो सौ आलेख, साक्षात्कार, कहानी, रिपोर्ताज़ आदि प्रकाशित। आकाशवाणी से तीन दर्जन से अधिक कार्यक्रमों का प्रसारण। अकादमिक कार्य से वर्ष 2009 में आमत कुमार विश्वास मॉरीशस तथा वर्ष 2012 में दक्षिण अफ्रीका की यात्रा। हाल ही में इनकी पुस्तक ‘गाँधी-दृष्टि : युवा रचनात्मकता के आयाम' (सम्पा.), प्रकाशित हुई है और 'भूमण्डलीकरण मीडिया की आचार संहिता', 'चिन्तन सरोकार' आदि प्रकाशनाधीन हैं। सम्प्रति महात्मा गाँधी अन्तरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय, वर्धा में सहायक सम्पादक के रूप में कार्यरत

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